Correct Answer:
Option B - डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी के ‘अनामदास का पोथा’ उपन्यास को ‘रैक्व आख्यान’ भी कहा जाता है। इसमें औपनिषदिक युग के परिवेश एवं जीवन पद्धति का चित्रण है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी-सामाजिक सांस्कृतिक धारा के उपन्यासकार हैं। इनका एक अन्य उपन्यास बाणभट्ट की आत्मकथा (1946) सर्वप्रथम ‘विशाल भारत’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ, यह एक ऐतिहासिक हिन्दी उपन्यास है। इसमें तीन प्रमुख पात्र हैं– बाणभट्ट, भट्टिनी, निपुणिका। इसका विषय वस्तु प्रेम का उदात्तीकरण एवं हर्षकालीन सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का चित्रण है।
B. डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी के ‘अनामदास का पोथा’ उपन्यास को ‘रैक्व आख्यान’ भी कहा जाता है। इसमें औपनिषदिक युग के परिवेश एवं जीवन पद्धति का चित्रण है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी-सामाजिक सांस्कृतिक धारा के उपन्यासकार हैं। इनका एक अन्य उपन्यास बाणभट्ट की आत्मकथा (1946) सर्वप्रथम ‘विशाल भारत’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ, यह एक ऐतिहासिक हिन्दी उपन्यास है। इसमें तीन प्रमुख पात्र हैं– बाणभट्ट, भट्टिनी, निपुणिका। इसका विषय वस्तु प्रेम का उदात्तीकरण एवं हर्षकालीन सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का चित्रण है।