Correct Answer:
Option C - साइनाइडिंग सतह कठोरता की एक विधि है। इसमें धातु खण्ड की बाह्य सतह को कार्बन तथा नाइट्रोजन दोनों ही द्वारा संतृप्त किया जाता है। इसमें धातु खण्ड की भीतरी सतह मृदु तथा तन्य और साथ–साथ टफ भी बनी रहती है। इस विधि से पूर्ण सतह या उसका कुछ भाग कठोर किया जा सकता है। इस संक्रिया में स्टील के धातु खंड को निष्क्रिय पिघले लवणों Na₂ CO₂, Nacl आदि के साथ सायनाइड यौगिक Ca(CN)₂, NaCN आदि को घोलकर 850⁰C–950⁰C तापक्रम तक गर्म किया जाता है। गर्म करने की अवधि 5 स्ग्ह से 90 स्ग्ह तक रहती है।
• ये प्रक्रियाएँ ज्यादातर ऑटोमोबाइल्स पार्टो पर की जाती है।
नोट:-कार्बुराइजिंग, नाइट्राइडिंग एवं सायनाइडिंग निम्न व मध्यम कार्बन स्टील के लिए तथा इण्डक्शन हार्डेनिंग फ्लेम हार्डेनिंग उच्च कार्बन स्टील के लिए प्रयुक्त होते हैं।
C. साइनाइडिंग सतह कठोरता की एक विधि है। इसमें धातु खण्ड की बाह्य सतह को कार्बन तथा नाइट्रोजन दोनों ही द्वारा संतृप्त किया जाता है। इसमें धातु खण्ड की भीतरी सतह मृदु तथा तन्य और साथ–साथ टफ भी बनी रहती है। इस विधि से पूर्ण सतह या उसका कुछ भाग कठोर किया जा सकता है। इस संक्रिया में स्टील के धातु खंड को निष्क्रिय पिघले लवणों Na₂ CO₂, Nacl आदि के साथ सायनाइड यौगिक Ca(CN)₂, NaCN आदि को घोलकर 850⁰C–950⁰C तापक्रम तक गर्म किया जाता है। गर्म करने की अवधि 5 स्ग्ह से 90 स्ग्ह तक रहती है।
• ये प्रक्रियाएँ ज्यादातर ऑटोमोबाइल्स पार्टो पर की जाती है।
नोट:-कार्बुराइजिंग, नाइट्राइडिंग एवं सायनाइडिंग निम्न व मध्यम कार्बन स्टील के लिए तथा इण्डक्शन हार्डेनिंग फ्लेम हार्डेनिंग उच्च कार्बन स्टील के लिए प्रयुक्त होते हैं।