Correct Answer:
Option B - ईंट मृदा में ऐलुमिना की भूमिका– ऐलुमिना में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं। चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंटों को वांछित आकार देती है। ऐलुमिना के कारण ही ईंट को ढाला जा सकता है अन्यथा बालू के कणों में कोई ससंजन नहीं होता है।
∎ ऐलुमिना की मात्रा आवश्यकता से अधिक होने पर ईंट सूखने पर अत्यधिक सिकुड़ जाती है व टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है और जमावे पर इसमें दरारें या फटान पड़ जाती हैं। ऐलुमिना का अनुपात कम होने पर ईंट की ढलाई में दिक्कत होती है।
■ अत: दिये गये कथनों में कथन A सत्य है तथा कथन B असत्य है।
B. ईंट मृदा में ऐलुमिना की भूमिका– ऐलुमिना में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं। चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंटों को वांछित आकार देती है। ऐलुमिना के कारण ही ईंट को ढाला जा सकता है अन्यथा बालू के कणों में कोई ससंजन नहीं होता है।
∎ ऐलुमिना की मात्रा आवश्यकता से अधिक होने पर ईंट सूखने पर अत्यधिक सिकुड़ जाती है व टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है और जमावे पर इसमें दरारें या फटान पड़ जाती हैं। ऐलुमिना का अनुपात कम होने पर ईंट की ढलाई में दिक्कत होती है।
■ अत: दिये गये कथनों में कथन A सत्य है तथा कथन B असत्य है।