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Q: Consider the given statements with respect to bricks. A. Alumina presence in the brick earth imparts plasticity to the bricks earth so that it can be moulded for the formation of bricks. B. If alumina is present in excess, raw bricks expand and swell during drying and burning. Identify cotherrect statement/s. ईंटों के संदर्भ में दिए गए कथनों पर विचार करें। A. ईंट वाली मिट्टी में ऐलुमिना की उपस्थिति उसे प्लास्टिकता प्रदान करती है ताकि इसे ईंटों के निर्माण के लिए ढाला जा सके। B. यदि ऐलुमिना अधिक मात्रा में हो, तो कच्ची ईंटें सूखने और जमावे के दौरान फैल जाती हैं। सही कथन/कथनों की पहचान करें।
  • A. Both the statements are true. दोनों कथन सही हैं।
  • B. Statement A is true B is false कथन A सही है, B गलत है।
  • C. Statement B is true A is false कथन B सही है, A गलत है।
  • D. Both the statements are false दोनों कथन गलत हैं।
Correct Answer: Option B - ईंट मृदा में ऐलुमिना की भूमिका– ऐलुमिना में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं। चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंटों को वांछित आकार देती है। ऐलुमिना के कारण ही ईंट को ढाला जा सकता है अन्यथा बालू के कणों में कोई ससंजन नहीं होता है। ∎ ऐलुमिना की मात्रा आवश्यकता से अधिक होने पर ईंट सूखने पर अत्यधिक सिकुड़ जाती है व टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है और जमावे पर इसमें दरारें या फटान पड़ जाती हैं। ऐलुमिना का अनुपात कम होने पर ईंट की ढलाई में दिक्कत होती है। ■ अत: दिये गये कथनों में कथन A सत्य है तथा कथन B असत्य है।
B. ईंट मृदा में ऐलुमिना की भूमिका– ऐलुमिना में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं। चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंटों को वांछित आकार देती है। ऐलुमिना के कारण ही ईंट को ढाला जा सकता है अन्यथा बालू के कणों में कोई ससंजन नहीं होता है। ∎ ऐलुमिना की मात्रा आवश्यकता से अधिक होने पर ईंट सूखने पर अत्यधिक सिकुड़ जाती है व टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है और जमावे पर इसमें दरारें या फटान पड़ जाती हैं। ऐलुमिना का अनुपात कम होने पर ईंट की ढलाई में दिक्कत होती है। ■ अत: दिये गये कथनों में कथन A सत्य है तथा कथन B असत्य है।

Explanations:

ईंट मृदा में ऐलुमिना की भूमिका– ऐलुमिना में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं। चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंटों को वांछित आकार देती है। ऐलुमिना के कारण ही ईंट को ढाला जा सकता है अन्यथा बालू के कणों में कोई ससंजन नहीं होता है। ∎ ऐलुमिना की मात्रा आवश्यकता से अधिक होने पर ईंट सूखने पर अत्यधिक सिकुड़ जाती है व टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है और जमावे पर इसमें दरारें या फटान पड़ जाती हैं। ऐलुमिना का अनुपात कम होने पर ईंट की ढलाई में दिक्कत होती है। ■ अत: दिये गये कथनों में कथन A सत्य है तथा कथन B असत्य है।