search
Q: Consider the four plans of Muhammad-Bin-Tughlaq?/मुहम्मद बिन तुगलक की चारों योजनाओं पर विचार कीजिए - 1. Transfer of capital/राजधानी परिवर्तन 2. Increasing rv योजनाओं का सही कालानुक्रम नीचे दिये गए कूट से पता करें- Codes/कूट :
  • A. 1, 2, 3, 4
  • B. 2, 1, 3, 4
  • C. 1, 2, 4, 3
  • D. 2, 1, 4, 3
Correct Answer: Option D - मुहम्मद बिन तुगलक एक महत्वाकाँक्षी एवं नवीन प्रयोग करने वाला सुल्तान था। उसने प्रशासन एवं राजस्व प्रणाली में सुधार के लिए निम्न योजनाएँ चलवायी– (1) दोआब में कर वृद्धि (1325-27 ई.) (2) राजधानी परिवर्तन (1326-27 ई.) (3) सांकेतिक मुद्रा का चलाना (1329-30 ई.) (4) कराचिल अभियान एवं खुरासान अभियान। बरनी के अनुसार, सुल्तान ने दोआब में कर की दर को 1/10–1/20 गुना अधिक कर दिया था। कर की दर इतना अधिक था कि लोग विद्रोह करने लगे तथा अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गयी। अत: सुल्तान ने भयावह स्थिति से निपटने के लिए किसानों को तकावी ऋण (सोन्धर) बाँटा तथा नवीन कृषि विभाग दीवान-ए-अमीर-कोही खोला गया जिसका प्रमुख अमीर-ए-कोही (दीवान-ए-कोही) था। इसका मुख्य कार्य राज्य की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता देकर कृषि योग्य भूमि का विस्तार करना था अर्थात् परती भूमि को कृषि योग्य बनाना था। यह विभाग कृषि की उन्नति के लिए फसल चक्र योजना भी लागू करता था।
D. मुहम्मद बिन तुगलक एक महत्वाकाँक्षी एवं नवीन प्रयोग करने वाला सुल्तान था। उसने प्रशासन एवं राजस्व प्रणाली में सुधार के लिए निम्न योजनाएँ चलवायी– (1) दोआब में कर वृद्धि (1325-27 ई.) (2) राजधानी परिवर्तन (1326-27 ई.) (3) सांकेतिक मुद्रा का चलाना (1329-30 ई.) (4) कराचिल अभियान एवं खुरासान अभियान। बरनी के अनुसार, सुल्तान ने दोआब में कर की दर को 1/10–1/20 गुना अधिक कर दिया था। कर की दर इतना अधिक था कि लोग विद्रोह करने लगे तथा अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गयी। अत: सुल्तान ने भयावह स्थिति से निपटने के लिए किसानों को तकावी ऋण (सोन्धर) बाँटा तथा नवीन कृषि विभाग दीवान-ए-अमीर-कोही खोला गया जिसका प्रमुख अमीर-ए-कोही (दीवान-ए-कोही) था। इसका मुख्य कार्य राज्य की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता देकर कृषि योग्य भूमि का विस्तार करना था अर्थात् परती भूमि को कृषि योग्य बनाना था। यह विभाग कृषि की उन्नति के लिए फसल चक्र योजना भी लागू करता था।

Explanations:

मुहम्मद बिन तुगलक एक महत्वाकाँक्षी एवं नवीन प्रयोग करने वाला सुल्तान था। उसने प्रशासन एवं राजस्व प्रणाली में सुधार के लिए निम्न योजनाएँ चलवायी– (1) दोआब में कर वृद्धि (1325-27 ई.) (2) राजधानी परिवर्तन (1326-27 ई.) (3) सांकेतिक मुद्रा का चलाना (1329-30 ई.) (4) कराचिल अभियान एवं खुरासान अभियान। बरनी के अनुसार, सुल्तान ने दोआब में कर की दर को 1/10–1/20 गुना अधिक कर दिया था। कर की दर इतना अधिक था कि लोग विद्रोह करने लगे तथा अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गयी। अत: सुल्तान ने भयावह स्थिति से निपटने के लिए किसानों को तकावी ऋण (सोन्धर) बाँटा तथा नवीन कृषि विभाग दीवान-ए-अमीर-कोही खोला गया जिसका प्रमुख अमीर-ए-कोही (दीवान-ए-कोही) था। इसका मुख्य कार्य राज्य की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता देकर कृषि योग्य भूमि का विस्तार करना था अर्थात् परती भूमि को कृषि योग्य बनाना था। यह विभाग कृषि की उन्नति के लिए फसल चक्र योजना भी लागू करता था।