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Q: Consider the following statements: निम्नलिखित वक्तव्यों पर विचार कीजिए – Assertion (A) Mahatma Gandhi postponed the Non Cooperation Movement in 1922. कथन (A) महात्मा गाँधी द्वारा 1922 में असहयोग आन्दोलन स्थगित कर दिया गया। Reason (R) The postponement was opposed by C. R. Das and Motilal Nehru. कारण (R) इस स्थगन का सी. आर. दास एवं मोतीलाल नेहरू द्वारा विरोध किया गया। Select the correct answer from the code given below: नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए – Code/कूट :
  • A. Both A and R are true, and R is the correct explanation of A/(A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
  • B. Both A and R are true, but R is NOT a correct explanation of A/(A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. A is true, but R is false (A) सही है, परन्तु (R) गलत है।
  • D. A is false, but R is true (A) गलत है, परन्तु (R) सही है
Correct Answer: Option B - महात्मा गाँधी द्वारा असहयोग आन्दोलन की शुरुआत 1 अगस्त, 1920 को की गई। दुर्भाग्यवश इसी दिन बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु भी हो गयी। परन्तु 4/5 फरवरी, 1922 ई. को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चौरी-चौरा नामक स्थान पर उत्तेजित भीड़ ने थाने में आग लगा दी जिससे 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए। इस घटना की सूचना दशरथ प्रसाद द्विवेदी ने गाँधी जी को तार द्वारा दिया। इस समय गाँधी जी बारदोली में थे। तार को पढ़ने के पश्चात गाँधी जी इस हिंसात्मक कार्यवाही से बहुत आहत हुए तथा 12 फरवरी, 1922 ई. को बारदोली में काँग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने असहयोग आन्दोलन स्थगित किए जाने की घोषणा कर दी थी। गाँधी जी द्वारा असहयोग आन्दोलन को ऐसे समय में वापस ले लिया गया जब यह आन्दोलन चरम पर था, मोतीलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, सी. आर. दास, अली बंधु तथा सी. राजगोपालाचारी आदि नेताओं ने आलोचना की। सुभाष चंद्र बोस ने असहयोग आंदोलन के स्थगन को `राष्ट्रीय विपत्ति' तथा नेहरू ने `विस्मय और संत्रास' की संज्ञा दी। असहयोग आन्दोलन समाप्त किए जाने के निर्णय के बारे में गाँधीजी ने `यंग इंडिया' में लिखा कि – ``आन्दोलन को हिंसक होने से बचाने के लिए मैं हर एक अपमान, हर एक यंत्रणापूर्ण बहिष्कार, यहाँ तक कि मौत भी सहने को तैयार हूँ।''
B. महात्मा गाँधी द्वारा असहयोग आन्दोलन की शुरुआत 1 अगस्त, 1920 को की गई। दुर्भाग्यवश इसी दिन बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु भी हो गयी। परन्तु 4/5 फरवरी, 1922 ई. को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चौरी-चौरा नामक स्थान पर उत्तेजित भीड़ ने थाने में आग लगा दी जिससे 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए। इस घटना की सूचना दशरथ प्रसाद द्विवेदी ने गाँधी जी को तार द्वारा दिया। इस समय गाँधी जी बारदोली में थे। तार को पढ़ने के पश्चात गाँधी जी इस हिंसात्मक कार्यवाही से बहुत आहत हुए तथा 12 फरवरी, 1922 ई. को बारदोली में काँग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने असहयोग आन्दोलन स्थगित किए जाने की घोषणा कर दी थी। गाँधी जी द्वारा असहयोग आन्दोलन को ऐसे समय में वापस ले लिया गया जब यह आन्दोलन चरम पर था, मोतीलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, सी. आर. दास, अली बंधु तथा सी. राजगोपालाचारी आदि नेताओं ने आलोचना की। सुभाष चंद्र बोस ने असहयोग आंदोलन के स्थगन को `राष्ट्रीय विपत्ति' तथा नेहरू ने `विस्मय और संत्रास' की संज्ञा दी। असहयोग आन्दोलन समाप्त किए जाने के निर्णय के बारे में गाँधीजी ने `यंग इंडिया' में लिखा कि – ``आन्दोलन को हिंसक होने से बचाने के लिए मैं हर एक अपमान, हर एक यंत्रणापूर्ण बहिष्कार, यहाँ तक कि मौत भी सहने को तैयार हूँ।''

Explanations:

महात्मा गाँधी द्वारा असहयोग आन्दोलन की शुरुआत 1 अगस्त, 1920 को की गई। दुर्भाग्यवश इसी दिन बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु भी हो गयी। परन्तु 4/5 फरवरी, 1922 ई. को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चौरी-चौरा नामक स्थान पर उत्तेजित भीड़ ने थाने में आग लगा दी जिससे 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए। इस घटना की सूचना दशरथ प्रसाद द्विवेदी ने गाँधी जी को तार द्वारा दिया। इस समय गाँधी जी बारदोली में थे। तार को पढ़ने के पश्चात गाँधी जी इस हिंसात्मक कार्यवाही से बहुत आहत हुए तथा 12 फरवरी, 1922 ई. को बारदोली में काँग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने असहयोग आन्दोलन स्थगित किए जाने की घोषणा कर दी थी। गाँधी जी द्वारा असहयोग आन्दोलन को ऐसे समय में वापस ले लिया गया जब यह आन्दोलन चरम पर था, मोतीलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, सी. आर. दास, अली बंधु तथा सी. राजगोपालाचारी आदि नेताओं ने आलोचना की। सुभाष चंद्र बोस ने असहयोग आंदोलन के स्थगन को `राष्ट्रीय विपत्ति' तथा नेहरू ने `विस्मय और संत्रास' की संज्ञा दी। असहयोग आन्दोलन समाप्त किए जाने के निर्णय के बारे में गाँधीजी ने `यंग इंडिया' में लिखा कि – ``आन्दोलन को हिंसक होने से बचाने के लिए मैं हर एक अपमान, हर एक यंत्रणापूर्ण बहिष्कार, यहाँ तक कि मौत भी सहने को तैयार हूँ।''