Correct Answer:
Option B - फर्न टेरिडोफाइटा वर्ग के अन्तर्गत आते हैं। इनमें जल एवं खनिज लवण के संवहन हेतु संवहन ऊतक (जाइलम, फ्लोएम) पाया जाता है। यह अपुष्पोद्भिद् (Cryptogamae) पादप हैं। इनमें पुष्प और बीज का निर्माण नहीं होता है। इनका शरीर जड़, तना एवं पत्ती में विभाजित रहता है। इनमें जननांग बहुकोशी होते हैं तथा बीजाणु (Spores) बीजाणुधानियों में उत्पन्न होते हैं। बीजाणु अंकुरित होकर प्रोथैलस (युग्मकोद्भिद) बनाते हैं। बीजाणुधानियाँ जिस पत्ती पर उत्पन्न होती हैं, उस पत्ती को बीजाणुपर्ण (Sporophyll) कहते हैं।
B. फर्न टेरिडोफाइटा वर्ग के अन्तर्गत आते हैं। इनमें जल एवं खनिज लवण के संवहन हेतु संवहन ऊतक (जाइलम, फ्लोएम) पाया जाता है। यह अपुष्पोद्भिद् (Cryptogamae) पादप हैं। इनमें पुष्प और बीज का निर्माण नहीं होता है। इनका शरीर जड़, तना एवं पत्ती में विभाजित रहता है। इनमें जननांग बहुकोशी होते हैं तथा बीजाणु (Spores) बीजाणुधानियों में उत्पन्न होते हैं। बीजाणु अंकुरित होकर प्रोथैलस (युग्मकोद्भिद) बनाते हैं। बीजाणुधानियाँ जिस पत्ती पर उत्पन्न होती हैं, उस पत्ती को बीजाणुपर्ण (Sporophyll) कहते हैं।