Correct Answer:
Option A - मुहम्मद-बिन-तुगलक ने ‘प्रतीक मुद्रा’ या टोकन करेंसी को प्रारम्भ किया था। उसने काँसे या पीतल की मुद्रा चलाने की योजना बनाई, जिसका मूल्य चाँदी के टंके के बराबर था। किन्तु यह योजना भी असफल सिद्ध हुई क्योंकि इस पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं था। लोगों ने बृहत् पैमाने पर जाली सिक्कों की ढलाई की, जिससे नये सिक्कों का मूल्य बाजार में गिरने लगा। अंतत: प्रतीक मुद्रा की योजना वापस ले लिया गया और सरकार ने काँसे के सिक्के के बदले चाँदी का सिक्का देना शुरू कर दिया।
A. मुहम्मद-बिन-तुगलक ने ‘प्रतीक मुद्रा’ या टोकन करेंसी को प्रारम्भ किया था। उसने काँसे या पीतल की मुद्रा चलाने की योजना बनाई, जिसका मूल्य चाँदी के टंके के बराबर था। किन्तु यह योजना भी असफल सिद्ध हुई क्योंकि इस पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं था। लोगों ने बृहत् पैमाने पर जाली सिक्कों की ढलाई की, जिससे नये सिक्कों का मूल्य बाजार में गिरने लगा। अंतत: प्रतीक मुद्रा की योजना वापस ले लिया गया और सरकार ने काँसे के सिक्के के बदले चाँदी का सिक्का देना शुरू कर दिया।