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Q: Consider the following statements— निम्न कथनों पर विचार कीजिए – Assertion (A) : Token currency plan of Muhammad Bin Tughlaq was failed. कथन (A) : मुहम्मद तुगलक की प्रतीक-मुद्रा योजना असफल सिद्ध हुई। Reason (R) : Muhammad Tughlaq had no appropriate control on circulation of currency. कारण (R) : मुहम्मद तुगलक का मुद्रा निर्गमन पर उचित नियंत्रण नहीं था। Choose the correct answer from the codes given below: सही उत्तर-का चयन नीचे दिए गए कूट से कीजिए – कूट :
  • A. A and R both are true and R is correct explanation of A/A और R दोनों सही है और R सही व्याख्या है A की
  • B. A and R both are true but R is not correct explanation of A/Aऔर R दोनों सही हैं परन्तु R सही व्याख्या नहीं है A की
  • C. A is true but R is false/A सही है परन्तु R गलत है
  • D. A is false but R is true/A गलत है परन्तु R सही है
Correct Answer: Option A - मुहम्मद-बिन-तुगलक ने ‘प्रतीक मुद्रा’ या टोकन करेंसी को प्रारम्भ किया था। उसने काँसे या पीतल की मुद्रा चलाने की योजना बनाई, जिसका मूल्य चाँदी के टंके के बराबर था। किन्तु यह योजना भी असफल सिद्ध हुई क्योंकि इस पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं था। लोगों ने बृहत् पैमाने पर जाली सिक्कों की ढलाई की, जिससे नये सिक्कों का मूल्य बाजार में गिरने लगा। अंतत: प्रतीक मुद्रा की योजना वापस ले लिया गया और सरकार ने काँसे के सिक्के के बदले चाँदी का सिक्का देना शुरू कर दिया।
A. मुहम्मद-बिन-तुगलक ने ‘प्रतीक मुद्रा’ या टोकन करेंसी को प्रारम्भ किया था। उसने काँसे या पीतल की मुद्रा चलाने की योजना बनाई, जिसका मूल्य चाँदी के टंके के बराबर था। किन्तु यह योजना भी असफल सिद्ध हुई क्योंकि इस पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं था। लोगों ने बृहत् पैमाने पर जाली सिक्कों की ढलाई की, जिससे नये सिक्कों का मूल्य बाजार में गिरने लगा। अंतत: प्रतीक मुद्रा की योजना वापस ले लिया गया और सरकार ने काँसे के सिक्के के बदले चाँदी का सिक्का देना शुरू कर दिया।

Explanations:

मुहम्मद-बिन-तुगलक ने ‘प्रतीक मुद्रा’ या टोकन करेंसी को प्रारम्भ किया था। उसने काँसे या पीतल की मुद्रा चलाने की योजना बनाई, जिसका मूल्य चाँदी के टंके के बराबर था। किन्तु यह योजना भी असफल सिद्ध हुई क्योंकि इस पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं था। लोगों ने बृहत् पैमाने पर जाली सिक्कों की ढलाई की, जिससे नये सिक्कों का मूल्य बाजार में गिरने लगा। अंतत: प्रतीक मुद्रा की योजना वापस ले लिया गया और सरकार ने काँसे के सिक्के के बदले चाँदी का सिक्का देना शुरू कर दिया।