Correct Answer:
Option B - पुशर ढाल (Pusher Gradient):-
पहाड़ी क्षेत्रों में रेल-मार्गो की लम्बाई कम करने के लिए तथा चट्टानों की कटान न्यूनतम रखने के लिए इसे नियन्त्रक ढाल से अधिक तीखा ढाल दी जाती है। ऐसा करने पर रेल की लम्बाई कम हो जाती है तथा मार्ग का निर्माण व्यय कम हो जाता है।
नियन्त्रक से अधिक दी गई ढाल को पुशर ग्रेडिएन्ट कहते है।
संवेग ढाल (Momentum Gradient):-जब गाड़ी ढाल से नीचे आ रही हो तो इसमें अतिरिक्त संवेग आ जाता है। यदि ट्रैक में नत ढाल (Downward Gradient) के तुरन्त बाद ही उन्नत ढाल (Upward Gradient) दिया गया है तो गाड़ी अपने इस अतिरिक्त संवेग के कारण, नियन्त्रक ढाल से भी अधिक ढाल पर आसानी से चढ़ जाती है। ऐसी ढाल को संवेग ढाल कहते है।
B. पुशर ढाल (Pusher Gradient):-
पहाड़ी क्षेत्रों में रेल-मार्गो की लम्बाई कम करने के लिए तथा चट्टानों की कटान न्यूनतम रखने के लिए इसे नियन्त्रक ढाल से अधिक तीखा ढाल दी जाती है। ऐसा करने पर रेल की लम्बाई कम हो जाती है तथा मार्ग का निर्माण व्यय कम हो जाता है।
नियन्त्रक से अधिक दी गई ढाल को पुशर ग्रेडिएन्ट कहते है।
संवेग ढाल (Momentum Gradient):-जब गाड़ी ढाल से नीचे आ रही हो तो इसमें अतिरिक्त संवेग आ जाता है। यदि ट्रैक में नत ढाल (Downward Gradient) के तुरन्त बाद ही उन्नत ढाल (Upward Gradient) दिया गया है तो गाड़ी अपने इस अतिरिक्त संवेग के कारण, नियन्त्रक ढाल से भी अधिक ढाल पर आसानी से चढ़ जाती है। ऐसी ढाल को संवेग ढाल कहते है।