Correct Answer:
Option D - क्योटो प्रोटोकॉल को संयुक्त राष्ट्र की पहल पर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए 1997 में ‘यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ (UNFCCC) के द्वारा अस्तित्व में लाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तापवृद्धि में कमी लाने के लिए हरित गृह गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना है। क्योटो प्रोटोकॉल को जलवायु परिवर्तन के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रोटोकॉल में कार्बन उत्सर्जन को 2012 तक 5.2 के औसत से ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को 1990 की उत्सर्जन दरों से नीचे लाने की बाध्यता थी।
D. क्योटो प्रोटोकॉल को संयुक्त राष्ट्र की पहल पर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए 1997 में ‘यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ (UNFCCC) के द्वारा अस्तित्व में लाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तापवृद्धि में कमी लाने के लिए हरित गृह गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना है। क्योटो प्रोटोकॉल को जलवायु परिवर्तन के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रोटोकॉल में कार्बन उत्सर्जन को 2012 तक 5.2 के औसत से ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को 1990 की उत्सर्जन दरों से नीचे लाने की बाध्यता थी।