Correct Answer:
Option D - जब क्षेत्र में सर्वे रेखाओं की दिशा व परस्पर क्षैतिज स्थिति ज्ञात करने के लिये, इनके मध्य कोण (लम्बाई के साथ-साथ) मापे जाते हैं, यह दिक्सूचक कहलाता है। यदि भूक्षेत्र काफी बड़ा व घनी आबादी वाला है और भवनों (built up area) अथवा अन्य बाधाओं से घिरा होने के कारण इसमें त्रिभुज, संयोग व जाँच रेखायें (जरीब सर्वेक्षण के लिये आवश्यक) डालना कठिन पड़ता है, तब ऐसे क्षेत्र के लिये दिक्सूचक उपकरण को मुक्त रखने के लिये, इसे चुम्बकीय क्षेत्रों से पर्याप्त दूरी पर स्थापित करना चाहिए और सर्वेक्षक को भी लौह वस्तुयें अपने पास से हटा देनी चाहिये।
D. जब क्षेत्र में सर्वे रेखाओं की दिशा व परस्पर क्षैतिज स्थिति ज्ञात करने के लिये, इनके मध्य कोण (लम्बाई के साथ-साथ) मापे जाते हैं, यह दिक्सूचक कहलाता है। यदि भूक्षेत्र काफी बड़ा व घनी आबादी वाला है और भवनों (built up area) अथवा अन्य बाधाओं से घिरा होने के कारण इसमें त्रिभुज, संयोग व जाँच रेखायें (जरीब सर्वेक्षण के लिये आवश्यक) डालना कठिन पड़ता है, तब ऐसे क्षेत्र के लिये दिक्सूचक उपकरण को मुक्त रखने के लिये, इसे चुम्बकीय क्षेत्रों से पर्याप्त दूरी पर स्थापित करना चाहिए और सर्वेक्षक को भी लौह वस्तुयें अपने पास से हटा देनी चाहिये।