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Q: चंद राज्य में नकद प्राप्त किया जाने वाला भू-कर कहलाता था –
  • A. सिरती
  • B. चूल्ह कर
  • C. मुंड कर
  • D. कटक
Correct Answer: Option A - चंद राज्य में नकद प्राप्त किया जाने वाला भू-कर सिरती कहलाता था। चंद राजवंश भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ मण्डल का एक मध्यकालीन रघुवंशी राजवंश था, जिन्होंने इस क्षेत्र पर 11वीं शताब्दी में कत्यूरी राजवंश के ह्रास के बाद से और 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों के आगमन तक शासन किया। जैसे गढ़वाल में परमार वंश के दौरान कला और संस्कृति के क्षेत्र में विकास हुआ। उसी समय में चंद वंश के शासन काल के दौरान कुमाऊँ में सांस्कृतिक और कला के क्षेत्र में बहुत बदलाव देखने को मिले। एटकिन्सन के अनुसार, चंद वंश का संस्थापक सोमचंद था। वहीं ‘‘कुमाऊँ का इतिहास’’ पुस्तक के लेखक बद्रीदत्त पाण्डे ने भी सोमचंद को चंदवंश का शासक माना है।
A. चंद राज्य में नकद प्राप्त किया जाने वाला भू-कर सिरती कहलाता था। चंद राजवंश भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ मण्डल का एक मध्यकालीन रघुवंशी राजवंश था, जिन्होंने इस क्षेत्र पर 11वीं शताब्दी में कत्यूरी राजवंश के ह्रास के बाद से और 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों के आगमन तक शासन किया। जैसे गढ़वाल में परमार वंश के दौरान कला और संस्कृति के क्षेत्र में विकास हुआ। उसी समय में चंद वंश के शासन काल के दौरान कुमाऊँ में सांस्कृतिक और कला के क्षेत्र में बहुत बदलाव देखने को मिले। एटकिन्सन के अनुसार, चंद वंश का संस्थापक सोमचंद था। वहीं ‘‘कुमाऊँ का इतिहास’’ पुस्तक के लेखक बद्रीदत्त पाण्डे ने भी सोमचंद को चंदवंश का शासक माना है।

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चंद राज्य में नकद प्राप्त किया जाने वाला भू-कर सिरती कहलाता था। चंद राजवंश भारत के उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ मण्डल का एक मध्यकालीन रघुवंशी राजवंश था, जिन्होंने इस क्षेत्र पर 11वीं शताब्दी में कत्यूरी राजवंश के ह्रास के बाद से और 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों के आगमन तक शासन किया। जैसे गढ़वाल में परमार वंश के दौरान कला और संस्कृति के क्षेत्र में विकास हुआ। उसी समय में चंद वंश के शासन काल के दौरान कुमाऊँ में सांस्कृतिक और कला के क्षेत्र में बहुत बदलाव देखने को मिले। एटकिन्सन के अनुसार, चंद वंश का संस्थापक सोमचंद था। वहीं ‘‘कुमाऊँ का इतिहास’’ पुस्तक के लेखक बद्रीदत्त पाण्डे ने भी सोमचंद को चंदवंश का शासक माना है।