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Q: ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ काव्य-संग्रह के रचनाकार हैं
  • A. धर्मवीर भारती
  • B. रघुवीर सहाय
  • C. मुक्तिबोध
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ काव्य संग्रह के रचनाकार मुक्तिबोध है। ⇒ मुक्तिबोध को ‘भयानक कवियों का कवि’ कहा जाता है। मुक्तिबोध तारसप्तक (1943) के कवि है। ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ काव्य संकलन में अधिक जटिल, बिंबों की सघनता तथा ठेठ देशी प्रतीकों वाली कविताओं की बहुलता है। मुक्तिबोध की कविताओं में नाटकीयता और रहस्य मुख्य रूप से विद्यमान है। इनकी भाषा-अनगढ़ तेजोदिप्त भाषा है। रामस्वरूप चतुर्वेदी के अनुसार-‘‘मुक्तिबोध का काव्य संकलन ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ एक बड़े कलाकार की स्केच बुक लगता है।’’ ⇒ मुक्तिबोध की काव्यसंकलन-चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964), भूरि-भूरि याक धूत (1980) ⇒ मुक्तिबोध रचनावली (6 खण्ड)-नेमिचन्द्र जैन ⇒ अंधेरे में मुक्तिबोध की बहुचर्चित व लम्बी कविता है। सन् 1964 में ‘कल्पना’ पत्रिका में ‘अंधेरे में’ कविता का प्रथम प्रकाशन ‘आशंका के द्वीप अंधेरे में’ नाम से हुआ था। ⇒ रामविलास शर्मा के अनुसार ‘‘मुक्तिबोध को ‘अधंरे में, कविता के नामक से अलग करके देखना असंभव है।’’
C. ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ काव्य संग्रह के रचनाकार मुक्तिबोध है। ⇒ मुक्तिबोध को ‘भयानक कवियों का कवि’ कहा जाता है। मुक्तिबोध तारसप्तक (1943) के कवि है। ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ काव्य संकलन में अधिक जटिल, बिंबों की सघनता तथा ठेठ देशी प्रतीकों वाली कविताओं की बहुलता है। मुक्तिबोध की कविताओं में नाटकीयता और रहस्य मुख्य रूप से विद्यमान है। इनकी भाषा-अनगढ़ तेजोदिप्त भाषा है। रामस्वरूप चतुर्वेदी के अनुसार-‘‘मुक्तिबोध का काव्य संकलन ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ एक बड़े कलाकार की स्केच बुक लगता है।’’ ⇒ मुक्तिबोध की काव्यसंकलन-चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964), भूरि-भूरि याक धूत (1980) ⇒ मुक्तिबोध रचनावली (6 खण्ड)-नेमिचन्द्र जैन ⇒ अंधेरे में मुक्तिबोध की बहुचर्चित व लम्बी कविता है। सन् 1964 में ‘कल्पना’ पत्रिका में ‘अंधेरे में’ कविता का प्रथम प्रकाशन ‘आशंका के द्वीप अंधेरे में’ नाम से हुआ था। ⇒ रामविलास शर्मा के अनुसार ‘‘मुक्तिबोध को ‘अधंरे में, कविता के नामक से अलग करके देखना असंभव है।’’

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‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ काव्य संग्रह के रचनाकार मुक्तिबोध है। ⇒ मुक्तिबोध को ‘भयानक कवियों का कवि’ कहा जाता है। मुक्तिबोध तारसप्तक (1943) के कवि है। ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ काव्य संकलन में अधिक जटिल, बिंबों की सघनता तथा ठेठ देशी प्रतीकों वाली कविताओं की बहुलता है। मुक्तिबोध की कविताओं में नाटकीयता और रहस्य मुख्य रूप से विद्यमान है। इनकी भाषा-अनगढ़ तेजोदिप्त भाषा है। रामस्वरूप चतुर्वेदी के अनुसार-‘‘मुक्तिबोध का काव्य संकलन ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ एक बड़े कलाकार की स्केच बुक लगता है।’’ ⇒ मुक्तिबोध की काव्यसंकलन-चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964), भूरि-भूरि याक धूत (1980) ⇒ मुक्तिबोध रचनावली (6 खण्ड)-नेमिचन्द्र जैन ⇒ अंधेरे में मुक्तिबोध की बहुचर्चित व लम्बी कविता है। सन् 1964 में ‘कल्पना’ पत्रिका में ‘अंधेरे में’ कविता का प्रथम प्रकाशन ‘आशंका के द्वीप अंधेरे में’ नाम से हुआ था। ⇒ रामविलास शर्मा के अनुसार ‘‘मुक्तिबोध को ‘अधंरे में, कविता के नामक से अलग करके देखना असंभव है।’’