Correct Answer:
Option B - चालक विकास की दर में व्यक्तिगत विविधताएँ होती हैं, फिर भी चालक विकास का क्रम अपरिष्कृत (स्थूल) चालक विकास से परिष्कृत (सूक्ष्म) चालक विकास तक है। सर्वप्रथम स्थूल चालक विकास के फलस्वरूप बच्चे शारीरिक गतिविधियों का नियंत्रण एवं समन्वय सीखते हैं, जिससे वे गतिविधियों को कर पाने में, शारीरिक संतुलन, गति एवं नियंत्रण कर पाने में समर्थ हो पाते हैं। जैसे– चलना, दौड़ना, कूदना और पैरों से प्रहार करना आदि। उसके बाद सूक्ष्म चालक विकास के फलस्वरूप बालक अपने संसार के बारे में सीखने के विभिन्न प्रयासों में वस्तुओं को उठाने, पकड़ने और जाँच परख करने की क्रियाएँ सीखते हैं। यही कारण है कि चालक विकास की दर में व्यक्तिगत विविधताएँ होते हुए भी क्रम स्थूल से सूक्ष्म विकास की ओर होता है।
B. चालक विकास की दर में व्यक्तिगत विविधताएँ होती हैं, फिर भी चालक विकास का क्रम अपरिष्कृत (स्थूल) चालक विकास से परिष्कृत (सूक्ष्म) चालक विकास तक है। सर्वप्रथम स्थूल चालक विकास के फलस्वरूप बच्चे शारीरिक गतिविधियों का नियंत्रण एवं समन्वय सीखते हैं, जिससे वे गतिविधियों को कर पाने में, शारीरिक संतुलन, गति एवं नियंत्रण कर पाने में समर्थ हो पाते हैं। जैसे– चलना, दौड़ना, कूदना और पैरों से प्रहार करना आदि। उसके बाद सूक्ष्म चालक विकास के फलस्वरूप बालक अपने संसार के बारे में सीखने के विभिन्न प्रयासों में वस्तुओं को उठाने, पकड़ने और जाँच परख करने की क्रियाएँ सीखते हैं। यही कारण है कि चालक विकास की दर में व्यक्तिगत विविधताएँ होते हुए भी क्रम स्थूल से सूक्ष्म विकास की ओर होता है।