Correct Answer:
Option D - जैन धर्म के चौबीसवें एवं अंतिम तीर्थंकर महावीर थे। महावीर स्वामी का जन्म 599 ई. पूर्व में कुण्डग्राम (वैशाली) में हुआ था। जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थकर ऋषभ देव थे। जैन धर्म दो समुदायों में विभाजित हैं–(1) श्वेताम्बर, (2) दिगम्बर। जैन साहित्य बहुत विशाल है जिनमें से अधिकांश धार्मिक साहित्य ही है। संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं में यह साहित्य लिखा गया है। जैन धर्म के त्रिरत्न है – सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण।
D. जैन धर्म के चौबीसवें एवं अंतिम तीर्थंकर महावीर थे। महावीर स्वामी का जन्म 599 ई. पूर्व में कुण्डग्राम (वैशाली) में हुआ था। जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थकर ऋषभ देव थे। जैन धर्म दो समुदायों में विभाजित हैं–(1) श्वेताम्बर, (2) दिगम्बर। जैन साहित्य बहुत विशाल है जिनमें से अधिकांश धार्मिक साहित्य ही है। संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं में यह साहित्य लिखा गया है। जैन धर्म के त्रिरत्न है – सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण।