Correct Answer:
Option A - विकासात्मक परिवर्तन एक क्रमबद्ध और क्रमिक तरीके से होते हैं। विकास एक सतत-प्रक्रिया है जो जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त तक चलती है। विकास की अपनी एक निश्चित पद्धति होती है जो सदा सामान्य से विशिष्ट दिशा की ओर चलती है। यह बालक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व में आने वाले विभिन्न परिवर्तनों का प्रतिनिधित्व करता है, चाहे वे परिवर्तन सामाजिक, शारीरिक, संवेगात्मक या बौद्धिक हो। यह गुणात्मक परिवर्तनों की ओर संकेत करता है। अत: विकास में कोई आकस्मिक परिवर्तन नहीं होता है वरन् यह अनवरत लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
A. विकासात्मक परिवर्तन एक क्रमबद्ध और क्रमिक तरीके से होते हैं। विकास एक सतत-प्रक्रिया है जो जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त तक चलती है। विकास की अपनी एक निश्चित पद्धति होती है जो सदा सामान्य से विशिष्ट दिशा की ओर चलती है। यह बालक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व में आने वाले विभिन्न परिवर्तनों का प्रतिनिधित्व करता है, चाहे वे परिवर्तन सामाजिक, शारीरिक, संवेगात्मक या बौद्धिक हो। यह गुणात्मक परिवर्तनों की ओर संकेत करता है। अत: विकास में कोई आकस्मिक परिवर्तन नहीं होता है वरन् यह अनवरत लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।