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Q: बाल्यावस्था की अवधारणा से क्या अभिप्राय है ?
  • A. समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह एक सामाजिक संरचना है।
  • B. यह है कि बच्चे दुष्ट रूप में पैदा होते हैं और उन्हें सभ्य बनाना होता है
  • C. यह कि बच्चे शून्य से शुरुआत करते हैं और उनके गुण पूरी तरह से परिवेश के द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
  • D. यह विभिन्न सांस्कृतिक संदर्भो में सार्वभौम रूप से समान है।
Correct Answer: Option A - समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बाल्यावस्था एक सामाजिक संरचना की अवस्था है। बाल्यावस्था में समाजीकरण की गति तीव्र हो जाती है। बालक समाज के प्रत्यक्ष संपर्क में आता है, जिसके फलस्वरूप उसका सामाजिक विकास तीव्र गति से होता है। बाल्यावस्था में समूह सदस्यता, सामाजिक गुण, बहिर्मुखी प्रवृत्ति, सामाजिक स्वीकृति की चाह, मित्र चयन आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।
A. समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बाल्यावस्था एक सामाजिक संरचना की अवस्था है। बाल्यावस्था में समाजीकरण की गति तीव्र हो जाती है। बालक समाज के प्रत्यक्ष संपर्क में आता है, जिसके फलस्वरूप उसका सामाजिक विकास तीव्र गति से होता है। बाल्यावस्था में समूह सदस्यता, सामाजिक गुण, बहिर्मुखी प्रवृत्ति, सामाजिक स्वीकृति की चाह, मित्र चयन आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।

Explanations:

समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बाल्यावस्था एक सामाजिक संरचना की अवस्था है। बाल्यावस्था में समाजीकरण की गति तीव्र हो जाती है। बालक समाज के प्रत्यक्ष संपर्क में आता है, जिसके फलस्वरूप उसका सामाजिक विकास तीव्र गति से होता है। बाल्यावस्था में समूह सदस्यता, सामाजिक गुण, बहिर्मुखी प्रवृत्ति, सामाजिक स्वीकृति की चाह, मित्र चयन आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।