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Q: ‘बाजि बली रघुबंसिन के मनों सूरज के रथ चूमन चाहैं।’ पंक्ति में अलंकार है -
  • A. रूपक
  • B. संदेह
  • C. उत्प्रेक्षा
  • D. प्रतीप
Correct Answer: Option C - ‘बाजि बली रघुबंसिन के मनों सूरज के रथ-चूमन चाहैं।’ पंक्ति में ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार है। उत्प्रेक्षा अलंकार – जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए तथा पंक्ति में मनु, जनु, जानों, मानहु, मनों, निश्चय, ईव, ज्यों, आदि शब्द आता है तो वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
C. ‘बाजि बली रघुबंसिन के मनों सूरज के रथ-चूमन चाहैं।’ पंक्ति में ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार है। उत्प्रेक्षा अलंकार – जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए तथा पंक्ति में मनु, जनु, जानों, मानहु, मनों, निश्चय, ईव, ज्यों, आदि शब्द आता है तो वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

Explanations:

‘बाजि बली रघुबंसिन के मनों सूरज के रथ-चूमन चाहैं।’ पंक्ति में ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार है। उत्प्रेक्षा अलंकार – जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए तथा पंक्ति में मनु, जनु, जानों, मानहु, मनों, निश्चय, ईव, ज्यों, आदि शब्द आता है तो वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।