Explanations:
बृहत्कथा पैशाची भाषा शैली में लिखी गयी रचना है। संस्कृत का दुर्भाग्य है कि लोक कथाएँ मुख्यत: पैशाची भाषा में लिखित ‘गुणाढ्य’ की ‘बृहत्कथा’ पर आश्रित है। बृहत्कथा की भूमिका से पता चला है कि पहले इसमें सात लाख श्लोक थे किन्तु बाद में एक लाख ही केवल बचे हैं।