search
Q: संस्कृत व्याकरणे (पाणिनिमनुस्मृत्य) प्रत्याहाराणां संख्या कियती?
  • A. 54
  • B. 45
  • C. 43
  • D. 39
Correct Answer: Option C - संस्कृत व्याकरणे (पाणिनिमनुसृत्य) प्रत्याहाराणां संख्या त्रय: चत्वारिंशत् (43) संस्कृत व्याकरण में प्रत्याहारों की संख्या 43 है। प्रत्याहार का अर्थ होता है- ‘संक्षिप्त करना’। ‘आदिरन्त्येन सहेता’- आदि वर्ण अन्तिम इत् वर्ण के साथ मिलकर प्रत्याहार बनाता है जो आदि वर्ण एवं इत्संज्ञक अन्तिम वर्ण के पूर्व आए हुए वर्णों का समिष्ट रूप में बोध कराता है। ‘र्’ प्रत्याहार को लेकर कुल 43 प्रत्याहार हैं।
C. संस्कृत व्याकरणे (पाणिनिमनुसृत्य) प्रत्याहाराणां संख्या त्रय: चत्वारिंशत् (43) संस्कृत व्याकरण में प्रत्याहारों की संख्या 43 है। प्रत्याहार का अर्थ होता है- ‘संक्षिप्त करना’। ‘आदिरन्त्येन सहेता’- आदि वर्ण अन्तिम इत् वर्ण के साथ मिलकर प्रत्याहार बनाता है जो आदि वर्ण एवं इत्संज्ञक अन्तिम वर्ण के पूर्व आए हुए वर्णों का समिष्ट रूप में बोध कराता है। ‘र्’ प्रत्याहार को लेकर कुल 43 प्रत्याहार हैं।

Explanations:

संस्कृत व्याकरणे (पाणिनिमनुसृत्य) प्रत्याहाराणां संख्या त्रय: चत्वारिंशत् (43) संस्कृत व्याकरण में प्रत्याहारों की संख्या 43 है। प्रत्याहार का अर्थ होता है- ‘संक्षिप्त करना’। ‘आदिरन्त्येन सहेता’- आदि वर्ण अन्तिम इत् वर्ण के साथ मिलकर प्रत्याहार बनाता है जो आदि वर्ण एवं इत्संज्ञक अन्तिम वर्ण के पूर्व आए हुए वर्णों का समिष्ट रूप में बोध कराता है। ‘र्’ प्रत्याहार को लेकर कुल 43 प्रत्याहार हैं।