Correct Answer:
Option D - भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से भाषा और बोली में अंतर नहीं होता है। संसार की समस्त विकसित भाषाएँ अपने आरंभिक रूप में बोलियाँ ही रही होंगी जैसे रूसी, हिन्दी, अंग्रेजी आदि। अत: आज बोली कहलाने वाली ब्रज, अवधी, भोजपुरी आदि आगे चलकर भाषाएँ बन सकती हैं क्योंकि कोई भी बोली तभी तक बोली बनी रहती है जब तक कि उसे साहित्य, धर्म, व्यापार या राजनीति के कारण महत्त्व प्राप्त न हो जाये। दूसरे जब तक बोली अपनी विशेषताओं में इतनी विकसित न हो जाये कि पड़ोसी बोलियाँ उसे भिन्न न बना दें। इस तरह दोनों विशेषताओं के प्राप्त होते ही बोली भाषा बन जाती है।
D. भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से भाषा और बोली में अंतर नहीं होता है। संसार की समस्त विकसित भाषाएँ अपने आरंभिक रूप में बोलियाँ ही रही होंगी जैसे रूसी, हिन्दी, अंग्रेजी आदि। अत: आज बोली कहलाने वाली ब्रज, अवधी, भोजपुरी आदि आगे चलकर भाषाएँ बन सकती हैं क्योंकि कोई भी बोली तभी तक बोली बनी रहती है जब तक कि उसे साहित्य, धर्म, व्यापार या राजनीति के कारण महत्त्व प्राप्त न हो जाये। दूसरे जब तक बोली अपनी विशेषताओं में इतनी विकसित न हो जाये कि पड़ोसी बोलियाँ उसे भिन्न न बना दें। इस तरह दोनों विशेषताओं के प्राप्त होते ही बोली भाषा बन जाती है।