Correct Answer:
Option A - भारवि द्वारा रचित महाकाव्य ``किरातार्जुनीयम्' के कुल 18 सर्गों में कौरवों पर विजय प्राप्ति हेतु अर्जुन का हिमालय पर्वत जाकर तपस्या करने, आदि अनेक बातों/तथ्यों का वर्णन हैै। `किरातार्जुनीयम्' में मुख्यत: वीर रस का ही परिपाक दिखाई देता है। वीर रस के अतिरिक्त इसमें शृंगार तथा कुछ अन्य रसों का भी गौंण रूप में वर्णन है।
A. भारवि द्वारा रचित महाकाव्य ``किरातार्जुनीयम्' के कुल 18 सर्गों में कौरवों पर विजय प्राप्ति हेतु अर्जुन का हिमालय पर्वत जाकर तपस्या करने, आदि अनेक बातों/तथ्यों का वर्णन हैै। `किरातार्जुनीयम्' में मुख्यत: वीर रस का ही परिपाक दिखाई देता है। वीर रस के अतिरिक्त इसमें शृंगार तथा कुछ अन्य रसों का भी गौंण रूप में वर्णन है।