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Q: भारत में भाषिक विभिन्नता बहुत है। इस संदर्भ में विशेषकर कक्षा I और II के प्राथमिक स्तर पर बहुभाषिक कक्षाओं के बारे में सर्वथा उपयुक्त कथन है–
  • A. शिक्षार्थियों को अपनी मातृभाषा या स्थानीय भाषा का प्रयोग करने पर दंडित किया जाए।
  • B. विद्यालय में उन्हीं बच्चों को प्रवेश दिया जाए जिनकी मातृभाषा वही हो जो शिक्षा के लिए अपनाई जा रही हो
  • C. शिक्षक को सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए और सभी भाषाओं में अभिव्यक्ति के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • D. जो बच्चे कक्ष में मातृभाषा का उपयोग करते हैं अध्यापक को उनकी उपेक्षा करनी चाहिए।
Correct Answer: Option C - भाषिक विभिन्नता को शिक्षा में अवरोधक की बजाय एक अवसर के रूम में देखना चाहिए। यदि किसी कक्षा में बहुभाषी विद्यार्थी हैं विशेषकर कक्षा I और कक्षा II के प्राथामिक स्तर पर तो ऐसी परिस्थिति में शिक्षक को एक ऐसी शिक्षण प्रक्रिया का निर्माण करना चाहिए जिसमें सभी बच्चे सहजता से सीख सके तथा अपने भावों, विचारों आदि को अपनी भाषा में अभिव्यक्त कर सकें।
C. भाषिक विभिन्नता को शिक्षा में अवरोधक की बजाय एक अवसर के रूम में देखना चाहिए। यदि किसी कक्षा में बहुभाषी विद्यार्थी हैं विशेषकर कक्षा I और कक्षा II के प्राथामिक स्तर पर तो ऐसी परिस्थिति में शिक्षक को एक ऐसी शिक्षण प्रक्रिया का निर्माण करना चाहिए जिसमें सभी बच्चे सहजता से सीख सके तथा अपने भावों, विचारों आदि को अपनी भाषा में अभिव्यक्त कर सकें।

Explanations:

भाषिक विभिन्नता को शिक्षा में अवरोधक की बजाय एक अवसर के रूम में देखना चाहिए। यदि किसी कक्षा में बहुभाषी विद्यार्थी हैं विशेषकर कक्षा I और कक्षा II के प्राथामिक स्तर पर तो ऐसी परिस्थिति में शिक्षक को एक ऐसी शिक्षण प्रक्रिया का निर्माण करना चाहिए जिसमें सभी बच्चे सहजता से सीख सके तथा अपने भावों, विचारों आदि को अपनी भाषा में अभिव्यक्त कर सकें।