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Q: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने `संविधान के आधारभूत ढाँचे' के सिद्धान्त को स्पष्ट किया है :
  • A. गोलकनाथ वाद 1967 में
  • B. सज्जन सिंह वाद 1965 में
  • C. शंकरी प्रसाद वाद 1951 में
  • D. केशवानन्द भारती वाद 1973 में
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option D - न्यायिक व्याख्या भारत में संविधान की मूल संरचना का स्रोत है। केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य वाद (1973) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने `भारतीय संविधान के आधारभूत ढाँचे' के सिद्धान्त को स्पष्ट किया है। इस वाद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के मूल ढाँचे के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार उसे अक्षुण्ण बनाए रखते हुए ही भारतीय संसद संविधान संशोधन की शक्ति का उपयोग कर सकती है।
D. न्यायिक व्याख्या भारत में संविधान की मूल संरचना का स्रोत है। केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य वाद (1973) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने `भारतीय संविधान के आधारभूत ढाँचे' के सिद्धान्त को स्पष्ट किया है। इस वाद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के मूल ढाँचे के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार उसे अक्षुण्ण बनाए रखते हुए ही भारतीय संसद संविधान संशोधन की शक्ति का उपयोग कर सकती है।

Explanations:

न्यायिक व्याख्या भारत में संविधान की मूल संरचना का स्रोत है। केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य वाद (1973) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने `भारतीय संविधान के आधारभूत ढाँचे' के सिद्धान्त को स्पष्ट किया है। इस वाद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के मूल ढाँचे के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार उसे अक्षुण्ण बनाए रखते हुए ही भारतीय संसद संविधान संशोधन की शक्ति का उपयोग कर सकती है।