Correct Answer:
Option C - रस संप्रदाय के प्रवर्तक भरतमुनि के रससूत्र ‘विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:’ अर्थात् विभाव अनुभाव तथा व्यभिचारी (संचारी) के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। अत: भरत मुनि के रस सूत्र में स्थायीभाव का उल्लेख नहीं हैं।
C. रस संप्रदाय के प्रवर्तक भरतमुनि के रससूत्र ‘विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:’ अर्थात् विभाव अनुभाव तथा व्यभिचारी (संचारी) के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। अत: भरत मुनि के रस सूत्र में स्थायीभाव का उल्लेख नहीं हैं।