Explanations:
सन् 1868 ई. में त्रावणकोर नरेश ने अपने व परिवार के तैल चित्र बनवाने के लिए सुप्रसिद्ध चित्रकार `थियोडोर जैनसन' को आमंत्रित किया। राजा रवि वर्मा ने उनसे भेंट की और उन्हें जैनसन का काम देखने की अनुमति मिली। उनकी ग्राह्य शक्ति प्रबल थी। अत: उनके काम को देखकर ही तैल चित्रण को आत्मसात कर लिया तथा त्रिवेन्द्रम के राज्याश्रय में कला का विकास किया। इस प्रकार तैल रंगों का प्रयोग सर्वप्रथम राजा रवि वर्मा द्वारा किया गया।