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Q: भोजन नली की दीवारों के संकुचन और प्रसरण को ........... गति कहा जाता है।
  • A. क्रमाकुंचन
  • B. जठर–संबंधी
  • C. दोलनी
  • D. अनुशिथिलन
Correct Answer: Option A - भोजन नली की दीवारों के संकुचन और प्रसरण को क्रमाकुंचन गति कहा जाता है। मुख गुहा से लार से सना हुआ भोजन निग द्वार ( Gullet) के द्वारा ग्रासनली में पहुँचता है, ग्रासनली एक लम्बी नली होती है, जो आमाशय में खुलती है। इसकी दीवार पेशीय या संकुचनशील होती है भोजन के पहुँचते ही ग्रासनली की दीवार में तुरंग की तरह संकुचन या सिकुड़न और शिथिलन या फैलाव शुरू होता है। जिसे क्रमाकुंचन कहते है।
A. भोजन नली की दीवारों के संकुचन और प्रसरण को क्रमाकुंचन गति कहा जाता है। मुख गुहा से लार से सना हुआ भोजन निग द्वार ( Gullet) के द्वारा ग्रासनली में पहुँचता है, ग्रासनली एक लम्बी नली होती है, जो आमाशय में खुलती है। इसकी दीवार पेशीय या संकुचनशील होती है भोजन के पहुँचते ही ग्रासनली की दीवार में तुरंग की तरह संकुचन या सिकुड़न और शिथिलन या फैलाव शुरू होता है। जिसे क्रमाकुंचन कहते है।

Explanations:

भोजन नली की दीवारों के संकुचन और प्रसरण को क्रमाकुंचन गति कहा जाता है। मुख गुहा से लार से सना हुआ भोजन निग द्वार ( Gullet) के द्वारा ग्रासनली में पहुँचता है, ग्रासनली एक लम्बी नली होती है, जो आमाशय में खुलती है। इसकी दीवार पेशीय या संकुचनशील होती है भोजन के पहुँचते ही ग्रासनली की दीवार में तुरंग की तरह संकुचन या सिकुड़न और शिथिलन या फैलाव शुरू होता है। जिसे क्रमाकुंचन कहते है।