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Q: बहु-भाषिकता हमारी ....... भी है और हमारी सभ्यता व .......... का अभिन्न अंग भी।
  • A. चुनौती, संस्कृति
  • B. पहचान, संस्कृति
  • C. समस्या, पहचान
  • D. विडम्बना, संस्कृति
Correct Answer: Option B - बहु-भाषिकता हमारी पहचान भी है और हमारी सभ्यता व संस्कृति का अंग भी। भारत की भाषिक विविधता एक जटिल चुनौती तो पेश करती ही है, लेकिन वह कई प्रकार के अवसर भी देती है। भारत केवल इस मामले में ही अनूठा नहीं है कि यहाँ अनेक प्रकार की भाषाएँ बोली जाती हैं बल्कि उन भाषाओं में अनेक भाषा परिवारों का प्रतिनिधित्व भी है, जैसे- इंडो-आर्यन, द्रविड़, ऑस्ट्रो एशियाटिक, तिब्बतों वर्मन और अंडमानी। अनेक भाषिक और सामाजिक-भाषिक विशेषताएँ ऐसी हैं जो सभी भाषाओं में समान रूप से पायी जाती हैं। यह इस बात का सबूत है कि भारत में विभिन्न भाषाएँ और संस्कृतियाँ सदियों से एक दूसरे को समृद्ध करती रही हैं।
B. बहु-भाषिकता हमारी पहचान भी है और हमारी सभ्यता व संस्कृति का अंग भी। भारत की भाषिक विविधता एक जटिल चुनौती तो पेश करती ही है, लेकिन वह कई प्रकार के अवसर भी देती है। भारत केवल इस मामले में ही अनूठा नहीं है कि यहाँ अनेक प्रकार की भाषाएँ बोली जाती हैं बल्कि उन भाषाओं में अनेक भाषा परिवारों का प्रतिनिधित्व भी है, जैसे- इंडो-आर्यन, द्रविड़, ऑस्ट्रो एशियाटिक, तिब्बतों वर्मन और अंडमानी। अनेक भाषिक और सामाजिक-भाषिक विशेषताएँ ऐसी हैं जो सभी भाषाओं में समान रूप से पायी जाती हैं। यह इस बात का सबूत है कि भारत में विभिन्न भाषाएँ और संस्कृतियाँ सदियों से एक दूसरे को समृद्ध करती रही हैं।

Explanations:

बहु-भाषिकता हमारी पहचान भी है और हमारी सभ्यता व संस्कृति का अंग भी। भारत की भाषिक विविधता एक जटिल चुनौती तो पेश करती ही है, लेकिन वह कई प्रकार के अवसर भी देती है। भारत केवल इस मामले में ही अनूठा नहीं है कि यहाँ अनेक प्रकार की भाषाएँ बोली जाती हैं बल्कि उन भाषाओं में अनेक भाषा परिवारों का प्रतिनिधित्व भी है, जैसे- इंडो-आर्यन, द्रविड़, ऑस्ट्रो एशियाटिक, तिब्बतों वर्मन और अंडमानी। अनेक भाषिक और सामाजिक-भाषिक विशेषताएँ ऐसी हैं जो सभी भाषाओं में समान रूप से पायी जाती हैं। यह इस बात का सबूत है कि भारत में विभिन्न भाषाएँ और संस्कृतियाँ सदियों से एक दूसरे को समृद्ध करती रही हैं।