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Q: ‘‘बच्चे का विकास एक सीधा पथ नहीं है, यह आगे बढ़ता है फिर पीछे मुड़ता है फिर आगे बढ़ता है।’’ उपरोक्त वाक्य विकास के किस सिद्धान्त को दर्शाता है?
  • A. एक रूपता सिद्धान्त
  • B. चक्रीय बढ़ोत्तरी
  • C. एक-दिशायी विकास
  • D. विकास की सततहीनता
Correct Answer: Option B - ‘‘बच्चे का विकास एक सीधा पथ नहीं है, यह आगे बढ़ता है फिर पीछे मुड़ता है फिर आगे बढ़ता है।’’ उपरोक्त वाक्य विकास के चक्रीय बढ़ोत्तरी सिद्धांत (Principle of spiral advancement) को दर्शाता है। इस सिद्धांत के अनुसार विकास रेखीय गति एवं स्थिर दर से न होकर चक्राकार (वर्तुलाकार) ढंग से होता है। वह एक-सी गति से सीधा चलकर विकास को प्राप्त नहीं करता बल्कि बढ़ते हुए पीछे हटकर अपने विकास को परिपक्व और स्थायी बनाते हुए चक्राकार या वर्तुलाकार आकृति की तरह आगे बढ़ता है। दूसरे शब्दों में, विकास प्रक्रिया के दौरान बीच-बीच में ऐसे अवसर आते हैं जो किसी क्षेत्र विशेष में विकास की पूर्व अर्जित स्थिति का समायोजन करने के लिए उस क्षेत्र की विकास प्रक्रिया लगभग आराम (Rest) की स्थिति में आ जाती है। कुछ अवधि के उपरान्त उस क्षेत्र में विकास की गति फिर बढ़ जाती है।
B. ‘‘बच्चे का विकास एक सीधा पथ नहीं है, यह आगे बढ़ता है फिर पीछे मुड़ता है फिर आगे बढ़ता है।’’ उपरोक्त वाक्य विकास के चक्रीय बढ़ोत्तरी सिद्धांत (Principle of spiral advancement) को दर्शाता है। इस सिद्धांत के अनुसार विकास रेखीय गति एवं स्थिर दर से न होकर चक्राकार (वर्तुलाकार) ढंग से होता है। वह एक-सी गति से सीधा चलकर विकास को प्राप्त नहीं करता बल्कि बढ़ते हुए पीछे हटकर अपने विकास को परिपक्व और स्थायी बनाते हुए चक्राकार या वर्तुलाकार आकृति की तरह आगे बढ़ता है। दूसरे शब्दों में, विकास प्रक्रिया के दौरान बीच-बीच में ऐसे अवसर आते हैं जो किसी क्षेत्र विशेष में विकास की पूर्व अर्जित स्थिति का समायोजन करने के लिए उस क्षेत्र की विकास प्रक्रिया लगभग आराम (Rest) की स्थिति में आ जाती है। कुछ अवधि के उपरान्त उस क्षेत्र में विकास की गति फिर बढ़ जाती है।

Explanations:

‘‘बच्चे का विकास एक सीधा पथ नहीं है, यह आगे बढ़ता है फिर पीछे मुड़ता है फिर आगे बढ़ता है।’’ उपरोक्त वाक्य विकास के चक्रीय बढ़ोत्तरी सिद्धांत (Principle of spiral advancement) को दर्शाता है। इस सिद्धांत के अनुसार विकास रेखीय गति एवं स्थिर दर से न होकर चक्राकार (वर्तुलाकार) ढंग से होता है। वह एक-सी गति से सीधा चलकर विकास को प्राप्त नहीं करता बल्कि बढ़ते हुए पीछे हटकर अपने विकास को परिपक्व और स्थायी बनाते हुए चक्राकार या वर्तुलाकार आकृति की तरह आगे बढ़ता है। दूसरे शब्दों में, विकास प्रक्रिया के दौरान बीच-बीच में ऐसे अवसर आते हैं जो किसी क्षेत्र विशेष में विकास की पूर्व अर्जित स्थिति का समायोजन करने के लिए उस क्षेत्र की विकास प्रक्रिया लगभग आराम (Rest) की स्थिति में आ जाती है। कुछ अवधि के उपरान्त उस क्षेत्र में विकास की गति फिर बढ़ जाती है।