Correct Answer:
Option A - अवर्णं अष्टादश भेदात्मकमस्ति । अर्थात् ‘अ’ वर्ण के अठ्ठारह भेद हैं। ‘अ’ आदि वर्णों के हस्व, दीर्घ और प्लुत तथा प्रत्येक के उदात्त, अनुदात्त और स्वरित के भेद से नौ-नौ भेद होकर पुन: अनुनासिक और निरनुनासिक के भेद से अठ्ठारह भेद हो जाते हैं।
अत: अ, इ, उ और ऋ के 18 भेद होते हैं।
ऌ वर्ण के बारह (12) भेद तथा ए, ऐ, ओ, औ के भी बारह भेद होते हैं।
A. अवर्णं अष्टादश भेदात्मकमस्ति । अर्थात् ‘अ’ वर्ण के अठ्ठारह भेद हैं। ‘अ’ आदि वर्णों के हस्व, दीर्घ और प्लुत तथा प्रत्येक के उदात्त, अनुदात्त और स्वरित के भेद से नौ-नौ भेद होकर पुन: अनुनासिक और निरनुनासिक के भेद से अठ्ठारह भेद हो जाते हैं।
अत: अ, इ, उ और ऋ के 18 भेद होते हैं।
ऌ वर्ण के बारह (12) भेद तथा ए, ऐ, ओ, औ के भी बारह भेद होते हैं।