Correct Answer:
Option D - हल्सन्धे शुद्धरूपं ‘प्रनश्यति’ नास्ति। प्रनश्यति के अलावा अन्य तीनों हल् सन्धि के शुद्ध रूप है जिसका सन्धि विच्छेद इस प्रकार है –
तत् + लीन: = तल्लीन : ।
सगुण् + ईश: = सुगण्णीश:।
वाक् + ईश: = वागीश: ।
D. हल्सन्धे शुद्धरूपं ‘प्रनश्यति’ नास्ति। प्रनश्यति के अलावा अन्य तीनों हल् सन्धि के शुद्ध रूप है जिसका सन्धि विच्छेद इस प्रकार है –
तत् + लीन: = तल्लीन : ।
सगुण् + ईश: = सुगण्णीश:।
वाक् + ईश: = वागीश: ।