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Q: अधोलिखितान् पद्यान् पठित्वा प्रश्नानां (25-30) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमं उत्तरं चिनुत । जाड्यं धियो हरति सिञचति वाचि सत्यम्, मानोन्नतिं दिशति पापमपाकरोति। चेत: पसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिम्, सत्सङ्गति: कथय किं न करोति पुंसाम् ।।1।। सर्पा: पिबन्ति पवनं न च दुर्बलास्ते, शुष्के : तृणै: वनगजा: बलिन: भवन्ति। सन्तोष एव पुरुषस्य परं निधानम् ।।2।। परिवर्तिनि संसारे मृत: को वा न जायते। स सत्सङ्गति: पुंसां किं कार्यं न करोति?
  • A. वाचि सत्यं सिञ्चति
  • B. मानोन्नतिं दिशति
  • C. दुष्कर्मणि नियोजयति
  • D. धियो जाड्यं हरति
Correct Answer: Option C - सत्सङ्गति: पुंसां ‘दुष्कर्मणि नियोजयति’ कार्यं न करोति। अर्थात सत्सङ्गति पुरूष को दुष्कर कर्म में लगाने का कार्य नही करती है। परन्तु वाणी में सत्य का संचार करती है, बुद्धि से जड़ता को हरती है और मान रूपी उन्नति दिशाओं में फैलाती है।
C. सत्सङ्गति: पुंसां ‘दुष्कर्मणि नियोजयति’ कार्यं न करोति। अर्थात सत्सङ्गति पुरूष को दुष्कर कर्म में लगाने का कार्य नही करती है। परन्तु वाणी में सत्य का संचार करती है, बुद्धि से जड़ता को हरती है और मान रूपी उन्नति दिशाओं में फैलाती है।

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सत्सङ्गति: पुंसां ‘दुष्कर्मणि नियोजयति’ कार्यं न करोति। अर्थात सत्सङ्गति पुरूष को दुष्कर कर्म में लगाने का कार्य नही करती है। परन्तु वाणी में सत्य का संचार करती है, बुद्धि से जड़ता को हरती है और मान रूपी उन्नति दिशाओं में फैलाती है।