Correct Answer:
Option B - उपर्युक्त में से ‘शुश्रूषस्व गुरून’’ श्लोक कण्व द्वारा कहा गया है। यह उपदेशात्मक पद्य है, जिसे कण्व ने शकुन्तला के विदाई के समय उपदेश रूप में कहा था। यह श्लोक, चतुष्टयों में से एक तथा शार्दूलविक्रीडित छन्द में है।
B. उपर्युक्त में से ‘शुश्रूषस्व गुरून’’ श्लोक कण्व द्वारा कहा गया है। यह उपदेशात्मक पद्य है, जिसे कण्व ने शकुन्तला के विदाई के समय उपदेश रूप में कहा था। यह श्लोक, चतुष्टयों में से एक तथा शार्दूलविक्रीडित छन्द में है।