Correct Answer:
Option B - उपर्युक्त उद्धरण में ‘प्रसाद’ काव्यगुण है। जिस प्रकार सूखे ईधन में अग्नि के समान अथवा स्वच्छ धुले हुए वस्त्र में जल के समान जो रचना पाठक के चित्त में सहसा व्याप्त हो जाती है, वह प्रसाद गुण युक्त कहलाती है। जैसे-
सखि वे मुझसे कहकर जाते
तो कह! क्या वे मुझको अपनी पथ बाधा ही पाते?
B. उपर्युक्त उद्धरण में ‘प्रसाद’ काव्यगुण है। जिस प्रकार सूखे ईधन में अग्नि के समान अथवा स्वच्छ धुले हुए वस्त्र में जल के समान जो रचना पाठक के चित्त में सहसा व्याप्त हो जाती है, वह प्रसाद गुण युक्त कहलाती है। जैसे-
सखि वे मुझसे कहकर जाते
तो कह! क्या वे मुझको अपनी पथ बाधा ही पाते?