Correct Answer:
Option A - तृतीय मूषक: ‘सर्वथा अन्ध:’ आसीत्। अर्थात् तीसरा चूहा ‘अन्धा’ था। इसका वर्णन उपर्युक्त गद्यांश में मिलता है जो इस प्रकार है- एक: पुष्टाङ्ग, अपर: कृशतनु: तृतीयस्तु सर्वथा अन्ध: एव आसीत्। अर्थात् पहला हृष्ट-पुष्ट, दूसरा दुबला-पतला (कृशाङ्ग) एवं तीसरा अन्धा था।
A. तृतीय मूषक: ‘सर्वथा अन्ध:’ आसीत्। अर्थात् तीसरा चूहा ‘अन्धा’ था। इसका वर्णन उपर्युक्त गद्यांश में मिलता है जो इस प्रकार है- एक: पुष्टाङ्ग, अपर: कृशतनु: तृतीयस्तु सर्वथा अन्ध: एव आसीत्। अर्थात् पहला हृष्ट-पुष्ट, दूसरा दुबला-पतला (कृशाङ्ग) एवं तीसरा अन्धा था।