Correct Answer:
Option B - रोदां की मान्यता थी कि ‘‘चित्रकला में त्रिमितियुक्त नैसर्गिक वस्तुओं का सादृश्य नहीं होता, अपितु मानवीय सौन्दर्य पर विचारों की प्रतिष्ठा का मुकुट चढ़ाया जाता है।’’ रोदां की कला ध्येय ‘‘असंभाव्य को संभाव्य रूप में सजीव चित्रित करना’’ था। रोदां प्रतीकवादी के साथ-साथ प्रभाववादी भी है। क्योंकि रोदां से अपनी कृतियों में उत्तर उन्नीसवीं शताब्दी के दो प्रबल प्रवृत्तियों का संयोजन किया है। अत: अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सही है।
B. रोदां की मान्यता थी कि ‘‘चित्रकला में त्रिमितियुक्त नैसर्गिक वस्तुओं का सादृश्य नहीं होता, अपितु मानवीय सौन्दर्य पर विचारों की प्रतिष्ठा का मुकुट चढ़ाया जाता है।’’ रोदां की कला ध्येय ‘‘असंभाव्य को संभाव्य रूप में सजीव चित्रित करना’’ था। रोदां प्रतीकवादी के साथ-साथ प्रभाववादी भी है। क्योंकि रोदां से अपनी कृतियों में उत्तर उन्नीसवीं शताब्दी के दो प्रबल प्रवृत्तियों का संयोजन किया है। अत: अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सही है।