Correct Answer:
Option B - भारवि: महाकाव्य विरचनं न त्यक्तवान् अर्थात्
भारवि ने महाकाव्य की रचना करना नहीं छोड़ा भारवि संस्कृत साहित्य के वृहत्त्रयी परम्परा के पहले कवि है। इन्होंने 18 सर्गों में किरातार्जुनीयम् महाकाव्य की रचना की है इन्हें आतपत्र भारवि कहा जाता है।
B. भारवि: महाकाव्य विरचनं न त्यक्तवान् अर्थात्
भारवि ने महाकाव्य की रचना करना नहीं छोड़ा भारवि संस्कृत साहित्य के वृहत्त्रयी परम्परा के पहले कवि है। इन्होंने 18 सर्गों में किरातार्जुनीयम् महाकाव्य की रचना की है इन्हें आतपत्र भारवि कहा जाता है।