search
Q: `अदेवमातृका:’ का प्रयोग किस ग्रन्थ में है?
  • A. अभिज्ञानशाकुन्तल चतुर्थ अंक
  • B. किरातार्जुनीयम् प्रथमसर्ग
  • C. उत्तररामचरितम् तृतीय अंक
  • D. कादम्बरी शुकनासोपदेश:
Correct Answer: Option B - `वितन्वति क्षेममदेवमातृकाश्चिराय तस्मिन् कुरवश्चकासति' (किरातार्जुनीयम् प्रथम सर्ग का 17वाँ श्लोकांश है।) प्रस्तुत श्लोकांश में `अदेवमातृका:' शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ है - वर्षा के जल के सहारे न रहने वाले।
B. `वितन्वति क्षेममदेवमातृकाश्चिराय तस्मिन् कुरवश्चकासति' (किरातार्जुनीयम् प्रथम सर्ग का 17वाँ श्लोकांश है।) प्रस्तुत श्लोकांश में `अदेवमातृका:' शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ है - वर्षा के जल के सहारे न रहने वाले।

Explanations:

`वितन्वति क्षेममदेवमातृकाश्चिराय तस्मिन् कुरवश्चकासति' (किरातार्जुनीयम् प्रथम सर्ग का 17वाँ श्लोकांश है।) प्रस्तुत श्लोकांश में `अदेवमातृका:' शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ है - वर्षा के जल के सहारे न रहने वाले।