Explanations:
• आर्थिक समीक्षा 2022-23 के अनुसार बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में समग्र गिरावट आई है। हाँलाकि, अन्तर्वाह (Inflow) पूर्व महामारी के स्तर से काफी उपर रहा जो संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी में सुधार के उपायों से प्रेरित था। जिससें भारत दुनियाँ में सबसे आकर्षक एफडीआई (FDI ) गन्तव्यों में से एक बना। • UNCTAD की विश्व निवेश रिपोर्ट ने अपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सेवा क्षेत्र की सूची में भारत को वर्ष 2021 में शीर्ष 20 मेजबान देशों में सातवें सबसे बड़े प्राप्तकर्त्ता के रूप में दर्शाया है। किन्तु वित्त वर्ष 2022 में भारत को सेवा क्षेत्र में 7.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की FDI इक्विटी प्रवाह सहित 84.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की उच्चतम FDIअन्तर्वाह प्राप्त हुई। • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी पोर्ट फोलियो निवेश (FPI) से मिलकर विदेशी निवेश पूंजीगत घाटे का सबसे बड़ा घटक है। वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में निवल (FDI) प्रवाह 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जो कि वित्त वर्ष 2022 की इसी अवधि के 20.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से कम है। • रूस-यूक्रेन और संयुक्त राज्य अमेरिका (फेडरल रि़जर्व) द्वारा आक्रामक मौद्रिक नीति को कड़ा करने के नतीजों ने वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता को बढ़ा दिया जिससे विदेशी पोर्ट फोलियो निवेश का निवल वहिर्वाह (आउट फ्लो) हुआ। अप्रैल-दिसम्बर, 2022 के दौरान 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवल आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि एक साल पहले 0.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आउट फ्लो हुआ था।