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Q: ‘कोटि कुलिस सम बचन तुम्हारा।’ –पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
  • A. उपमा
  • B. विरोधाभास
  • C. उत्प्रेक्षा
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - कोटि-कुलिस सम बचन तुम्हारा। पंक्ति में उपमा अलंकार है। ⇒ उपमा अलंकार-जहाँ एक वस्तु की समता दूसरी वस्तु से की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, ‘मा’ का मापना या तोलना। अत: उपमा का अर्थ है दो वस्तुओं को एक दूसरे के समीप रखकर तोलना। ⇒ जिस शब्द के द्वारा यह तुलना प्रकट होती है, उसे ‘वाचक’ कहते है। जैसे-यहाँ समान। सा, सी, से, समान, सदृश, सम, सरिस इमि, जिमि, ज्यों जैसे आदि वाचक है। ⇒ कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा में उपमा, अलंकार है क्योंकि परशुराम जी के एक-एक वचनों को वङ्का के समान बताया गया है। ⇒ उत्प्रेक्षा अलंकार-जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। मानों, मानहु, मनहु, मन जानो जानहु, जनु, निश्चय, मेरे जान, इव, इत्यादि उत्प्रेक्षा के वाचक शब्द है। जैसे- चमचमात चंचल नयन बिच घूँघट पट झीन। मानहु सुरसरिता विमल जल उछरीत युग मीन।। ⇒ विरोधाभास अलंकार-जब दो विरोधी पदार्थों का संयोग एक साथ दिखाया जाय, तब विरोघाभास अलंकार होता है। जैसे- सुलगी अनुराग की आग वहाँ, जल से भरपूर जड़ाग जहाँ।
A. कोटि-कुलिस सम बचन तुम्हारा। पंक्ति में उपमा अलंकार है। ⇒ उपमा अलंकार-जहाँ एक वस्तु की समता दूसरी वस्तु से की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, ‘मा’ का मापना या तोलना। अत: उपमा का अर्थ है दो वस्तुओं को एक दूसरे के समीप रखकर तोलना। ⇒ जिस शब्द के द्वारा यह तुलना प्रकट होती है, उसे ‘वाचक’ कहते है। जैसे-यहाँ समान। सा, सी, से, समान, सदृश, सम, सरिस इमि, जिमि, ज्यों जैसे आदि वाचक है। ⇒ कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा में उपमा, अलंकार है क्योंकि परशुराम जी के एक-एक वचनों को वङ्का के समान बताया गया है। ⇒ उत्प्रेक्षा अलंकार-जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। मानों, मानहु, मनहु, मन जानो जानहु, जनु, निश्चय, मेरे जान, इव, इत्यादि उत्प्रेक्षा के वाचक शब्द है। जैसे- चमचमात चंचल नयन बिच घूँघट पट झीन। मानहु सुरसरिता विमल जल उछरीत युग मीन।। ⇒ विरोधाभास अलंकार-जब दो विरोधी पदार्थों का संयोग एक साथ दिखाया जाय, तब विरोघाभास अलंकार होता है। जैसे- सुलगी अनुराग की आग वहाँ, जल से भरपूर जड़ाग जहाँ।

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कोटि-कुलिस सम बचन तुम्हारा। पंक्ति में उपमा अलंकार है। ⇒ उपमा अलंकार-जहाँ एक वस्तु की समता दूसरी वस्तु से की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, ‘मा’ का मापना या तोलना। अत: उपमा का अर्थ है दो वस्तुओं को एक दूसरे के समीप रखकर तोलना। ⇒ जिस शब्द के द्वारा यह तुलना प्रकट होती है, उसे ‘वाचक’ कहते है। जैसे-यहाँ समान। सा, सी, से, समान, सदृश, सम, सरिस इमि, जिमि, ज्यों जैसे आदि वाचक है। ⇒ कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा में उपमा, अलंकार है क्योंकि परशुराम जी के एक-एक वचनों को वङ्का के समान बताया गया है। ⇒ उत्प्रेक्षा अलंकार-जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। मानों, मानहु, मनहु, मन जानो जानहु, जनु, निश्चय, मेरे जान, इव, इत्यादि उत्प्रेक्षा के वाचक शब्द है। जैसे- चमचमात चंचल नयन बिच घूँघट पट झीन। मानहु सुरसरिता विमल जल उछरीत युग मीन।। ⇒ विरोधाभास अलंकार-जब दो विरोधी पदार्थों का संयोग एक साथ दिखाया जाय, तब विरोघाभास अलंकार होता है। जैसे- सुलगी अनुराग की आग वहाँ, जल से भरपूर जड़ाग जहाँ।