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Q: अर्थो हि कन्या परकीय एव - इत्यस्मिन् श्लोके छन्द:
  • A. इन्द्रवङ्काा
  • B. उपजाति
  • C. आर्याजाति
  • D. वंशस्थ
Correct Answer: Option A - ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव- इत्यस्मिन् श्लोके इन्द्रवङ्काा छन्द:। इन्द्रवङ्काा- ‘स्यादिन्द्रवङ्काा यदि तौ जगौ ग:’ इन्द्रवङ्काा के प्रत्येक पाद में 11 वर्ण होते हैं। क्रमश: 2 तगण, 1 जगण, 2 गुरु जैसे-‘‘अर्थो हि कन्या परकीय एव, तामद्य सम्प्रेष्य परिग्रहीतु:। जातो ममायं विशद: प्रकामं, प्रत्यर्पितन्यास इवान्तरात्मा।।’’
A. ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव- इत्यस्मिन् श्लोके इन्द्रवङ्काा छन्द:। इन्द्रवङ्काा- ‘स्यादिन्द्रवङ्काा यदि तौ जगौ ग:’ इन्द्रवङ्काा के प्रत्येक पाद में 11 वर्ण होते हैं। क्रमश: 2 तगण, 1 जगण, 2 गुरु जैसे-‘‘अर्थो हि कन्या परकीय एव, तामद्य सम्प्रेष्य परिग्रहीतु:। जातो ममायं विशद: प्रकामं, प्रत्यर्पितन्यास इवान्तरात्मा।।’’

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‘अर्थो हि कन्या परकीय एव- इत्यस्मिन् श्लोके इन्द्रवङ्काा छन्द:। इन्द्रवङ्काा- ‘स्यादिन्द्रवङ्काा यदि तौ जगौ ग:’ इन्द्रवङ्काा के प्रत्येक पाद में 11 वर्ण होते हैं। क्रमश: 2 तगण, 1 जगण, 2 गुरु जैसे-‘‘अर्थो हि कन्या परकीय एव, तामद्य सम्प्रेष्य परिग्रहीतु:। जातो ममायं विशद: प्रकामं, प्रत्यर्पितन्यास इवान्तरात्मा।।’’