Correct Answer:
Option A - अरस्तू के अनुसार काव्य या कला का उद्भव मानव-प्रकृति की मौलिक प्रवृत्तियों का परिणाम है। मानव में स्वभावत: अनुकरण की शक्ति होती है। अनुकरण की क्रिया में आनन्दानुभूति होती है, जो सार्वभौमिक आनन्द से कम नहीं है। अनुकृतिजन्य आनन्द सहजात होता है। हम घृणित वस्तुओं को यथार्थ जगत में देखकर वितृष्णा का अनुभव करते हैं जबकि अनुकृति क्रिया से उन्हें चित्र-रूप में प्रस्तुत करने पर वे घृणित वस्तुएँ ही आनन्दप्रद हो जाती हैं।
A. अरस्तू के अनुसार काव्य या कला का उद्भव मानव-प्रकृति की मौलिक प्रवृत्तियों का परिणाम है। मानव में स्वभावत: अनुकरण की शक्ति होती है। अनुकरण की क्रिया में आनन्दानुभूति होती है, जो सार्वभौमिक आनन्द से कम नहीं है। अनुकृतिजन्य आनन्द सहजात होता है। हम घृणित वस्तुओं को यथार्थ जगत में देखकर वितृष्णा का अनुभव करते हैं जबकि अनुकृति क्रिया से उन्हें चित्र-रूप में प्रस्तुत करने पर वे घृणित वस्तुएँ ही आनन्दप्रद हो जाती हैं।