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Q: अपने जीवन-काल में सिर्फ तीन कहानियों की रचना कर हिंदी कथा साहित्य में अपनी अमिट पहचान बना लेने वाले रचनाकार का नाम है :
  • A. इलाचंद्र जोशी
  • B. चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • C. अज्ञेय
  • D. इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - चन्द्रधर शर्मा `गुलेरी' सिर्फ तीन कहानियों – `उसने कहा था', `बुद्ध का कांटा', तथा `सुखमय जीवन', की रचना करके हिन्दी कथा साहित्य में अमिट पहचान बनाने वाले रचनाकार हैं। चन्द्रधर शर्मा `गुलेरी' द्वारा लिखित `उसने कहा था' हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानी है। यह कहानी 1915 ई. में `सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। प्रथम महायुद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखी गई यह कहानी रचना शिल्प की दृस्टि से बेजोड़ है। कडि़याँ, अमरवल्लरी, खितीन बाबू, रोज, रेल की सीटी, हरिंसगार, शरणार्थी, मैना, सिगनेलर, गैंगरीन, हजामत का साबुन, पठार का धीरज अज्ञेय की कहानियाँ हैं। `विपथगा', `कोठरी की बात', `जयदोल', `अमरबल्लरी', `ये तेरे प्रतिरूप' तथा `परम्परा' अज्ञेय के कहानी संग्रह हैं।
B. चन्द्रधर शर्मा `गुलेरी' सिर्फ तीन कहानियों – `उसने कहा था', `बुद्ध का कांटा', तथा `सुखमय जीवन', की रचना करके हिन्दी कथा साहित्य में अमिट पहचान बनाने वाले रचनाकार हैं। चन्द्रधर शर्मा `गुलेरी' द्वारा लिखित `उसने कहा था' हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानी है। यह कहानी 1915 ई. में `सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। प्रथम महायुद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखी गई यह कहानी रचना शिल्प की दृस्टि से बेजोड़ है। कडि़याँ, अमरवल्लरी, खितीन बाबू, रोज, रेल की सीटी, हरिंसगार, शरणार्थी, मैना, सिगनेलर, गैंगरीन, हजामत का साबुन, पठार का धीरज अज्ञेय की कहानियाँ हैं। `विपथगा', `कोठरी की बात', `जयदोल', `अमरबल्लरी', `ये तेरे प्रतिरूप' तथा `परम्परा' अज्ञेय के कहानी संग्रह हैं।

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चन्द्रधर शर्मा `गुलेरी' सिर्फ तीन कहानियों – `उसने कहा था', `बुद्ध का कांटा', तथा `सुखमय जीवन', की रचना करके हिन्दी कथा साहित्य में अमिट पहचान बनाने वाले रचनाकार हैं। चन्द्रधर शर्मा `गुलेरी' द्वारा लिखित `उसने कहा था' हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानी है। यह कहानी 1915 ई. में `सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। प्रथम महायुद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखी गई यह कहानी रचना शिल्प की दृस्टि से बेजोड़ है। कडि़याँ, अमरवल्लरी, खितीन बाबू, रोज, रेल की सीटी, हरिंसगार, शरणार्थी, मैना, सिगनेलर, गैंगरीन, हजामत का साबुन, पठार का धीरज अज्ञेय की कहानियाँ हैं। `विपथगा', `कोठरी की बात', `जयदोल', `अमरबल्लरी', `ये तेरे प्रतिरूप' तथा `परम्परा' अज्ञेय के कहानी संग्रह हैं।