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Q: .
  • A. केवल (A) और (C)
  • B. केवल (C) और (D)
  • C. केवल (B) और (D)
  • D. केवल (D) और (E)
Correct Answer: Option B - ‘कल्पना सिद्धान्त’ के संबंध में निम्नलिखित कथन असत्य हैं- 1. मुख्य या प्रारम्भिक कल्पना एक आत्मिक ऊर्जा है जिसमें मन: शक्ति अथवा आत्मशक्ति के अन्य सभी पहलू प्रत्यक्ष ज्ञान शक्ति, विचार शक्ति, संकल्प शक्ति, मनोवेग आदि सभी समाहित हो जाते हैं। 2. कॉलरिज प्रज्ञा को प्रतिभा से ऊँचा मानते हैं, उसी प्रकार ललित कल्पना को कल्पना से श्रेष्ठ समझते हैं। • कॉलरिज प्रत्ययवादी थे और उनकी काव्य संबंधी धारण जैववादी सिद्धान्त पर आधारित है। • कॉलरिज ने कल्पना के संबंध में लिखा है, ‘‘इसमें संश्लेषणात्मक तथा जादुई शक्ति होती है जो विरोधी या विसंवादी धर्मों में सन्तुलन स्थापित करती है।’’ • कॉलरिज ने कल्पना पर तर्क संगत ढंग से विचार किया और कहा यह बेशक दिव्य शक्ति हो सकती है किन्तु रहस्यमय नहीं है। • कॉलरिज ने गौण या विधायक कल्पना को मुख्य कल्पना की प्रतिध्वनि माना है।
B. ‘कल्पना सिद्धान्त’ के संबंध में निम्नलिखित कथन असत्य हैं- 1. मुख्य या प्रारम्भिक कल्पना एक आत्मिक ऊर्जा है जिसमें मन: शक्ति अथवा आत्मशक्ति के अन्य सभी पहलू प्रत्यक्ष ज्ञान शक्ति, विचार शक्ति, संकल्प शक्ति, मनोवेग आदि सभी समाहित हो जाते हैं। 2. कॉलरिज प्रज्ञा को प्रतिभा से ऊँचा मानते हैं, उसी प्रकार ललित कल्पना को कल्पना से श्रेष्ठ समझते हैं। • कॉलरिज प्रत्ययवादी थे और उनकी काव्य संबंधी धारण जैववादी सिद्धान्त पर आधारित है। • कॉलरिज ने कल्पना के संबंध में लिखा है, ‘‘इसमें संश्लेषणात्मक तथा जादुई शक्ति होती है जो विरोधी या विसंवादी धर्मों में सन्तुलन स्थापित करती है।’’ • कॉलरिज ने कल्पना पर तर्क संगत ढंग से विचार किया और कहा यह बेशक दिव्य शक्ति हो सकती है किन्तु रहस्यमय नहीं है। • कॉलरिज ने गौण या विधायक कल्पना को मुख्य कल्पना की प्रतिध्वनि माना है।

Explanations:

‘कल्पना सिद्धान्त’ के संबंध में निम्नलिखित कथन असत्य हैं- 1. मुख्य या प्रारम्भिक कल्पना एक आत्मिक ऊर्जा है जिसमें मन: शक्ति अथवा आत्मशक्ति के अन्य सभी पहलू प्रत्यक्ष ज्ञान शक्ति, विचार शक्ति, संकल्प शक्ति, मनोवेग आदि सभी समाहित हो जाते हैं। 2. कॉलरिज प्रज्ञा को प्रतिभा से ऊँचा मानते हैं, उसी प्रकार ललित कल्पना को कल्पना से श्रेष्ठ समझते हैं। • कॉलरिज प्रत्ययवादी थे और उनकी काव्य संबंधी धारण जैववादी सिद्धान्त पर आधारित है। • कॉलरिज ने कल्पना के संबंध में लिखा है, ‘‘इसमें संश्लेषणात्मक तथा जादुई शक्ति होती है जो विरोधी या विसंवादी धर्मों में सन्तुलन स्थापित करती है।’’ • कॉलरिज ने कल्पना पर तर्क संगत ढंग से विचार किया और कहा यह बेशक दिव्य शक्ति हो सकती है किन्तु रहस्यमय नहीं है। • कॉलरिज ने गौण या विधायक कल्पना को मुख्य कल्पना की प्रतिध्वनि माना है।