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Q: अपभ्रंश के प्रथम कवि हैं
  • A. स्वयंभू
  • B. सरहपाद
  • C. पुष्पदंत
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - अपभ्रंश के प्रथम कवि ‘स्वंयभू’ हैं। स्वंयभू को ही जैन परम्परा का भी प्रथम कवि माना जाता है। पउमचरिउ, रिट्ठणेमि चरिउ स्वयंभू की रचनाएँ हैं। सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। पुष्पदंत को ‘हिन्दी का भवभूति’ कहा जाता है।
A. अपभ्रंश के प्रथम कवि ‘स्वंयभू’ हैं। स्वंयभू को ही जैन परम्परा का भी प्रथम कवि माना जाता है। पउमचरिउ, रिट्ठणेमि चरिउ स्वयंभू की रचनाएँ हैं। सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। पुष्पदंत को ‘हिन्दी का भवभूति’ कहा जाता है।

Explanations:

अपभ्रंश के प्रथम कवि ‘स्वंयभू’ हैं। स्वंयभू को ही जैन परम्परा का भी प्रथम कवि माना जाता है। पउमचरिउ, रिट्ठणेमि चरिउ स्वयंभू की रचनाएँ हैं। सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। पुष्पदंत को ‘हिन्दी का भवभूति’ कहा जाता है।