Correct Answer:
Option A - `अन्तवन्त इमे देहा:' का तात्पर्य है कि ये शरीर नाशवान है। यह श्लोक श्रीमद्भगवद् गीता के द्वितीय अध्याय के 18वें श्लोक से उद्धृत है। इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं – कि इस जगत (संसार) में सभी प्रकार के शरीरों का एक न एक दिन अन्त निश्चित है। मात्र इतना समझना है कि शरीरों का अन्त दु:खों के कारण नहीं होना चाहिए।
A. `अन्तवन्त इमे देहा:' का तात्पर्य है कि ये शरीर नाशवान है। यह श्लोक श्रीमद्भगवद् गीता के द्वितीय अध्याय के 18वें श्लोक से उद्धृत है। इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं – कि इस जगत (संसार) में सभी प्रकार के शरीरों का एक न एक दिन अन्त निश्चित है। मात्र इतना समझना है कि शरीरों का अन्त दु:खों के कारण नहीं होना चाहिए।