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Q: ‘‘अनाघ्रातं पुष्पं किसलयमलूनं कररुहै:’’ यह उक्ति है
  • A. शकुन्तला की
  • B. दुष्यन्त की
  • C. विदूषक की
  • D. प्रियंवदा की
Correct Answer: Option B - ‘‘अनाघ्रातं पुष्पं किसलयमनूलं कररुहै:’’ यह उक्ति दुष्यन्त की है। दुष्यन्त शकुन्तला के रूप लावण्य को देखकर कहते हैं कि - ‘‘अनाघ्रातं पुष्पं किसलयममलूनं कररुहै रनाविद्धं रत्नं मधु नवमनास्वादितरसम्। अखण्ड पुण्यानां फलमिव च तद्रूपमनघं न जाने भोक्तारं किमिह समुपस्थास्यति विधि:।।’’ अर्थात् - वह बिना सूंघा हुआ पुष्प है। नाखूनों से अनछुई कोपल है, वेदाग रत्न है, अनजाने स्वादवाला ताजा शब्द शहद है, वह अखण्ड पुष्पों का निष्कलंक फल है। विधि न जाने किसको उस फल का भोक्ता बनाएगा।
B. ‘‘अनाघ्रातं पुष्पं किसलयमनूलं कररुहै:’’ यह उक्ति दुष्यन्त की है। दुष्यन्त शकुन्तला के रूप लावण्य को देखकर कहते हैं कि - ‘‘अनाघ्रातं पुष्पं किसलयममलूनं कररुहै रनाविद्धं रत्नं मधु नवमनास्वादितरसम्। अखण्ड पुण्यानां फलमिव च तद्रूपमनघं न जाने भोक्तारं किमिह समुपस्थास्यति विधि:।।’’ अर्थात् - वह बिना सूंघा हुआ पुष्प है। नाखूनों से अनछुई कोपल है, वेदाग रत्न है, अनजाने स्वादवाला ताजा शब्द शहद है, वह अखण्ड पुष्पों का निष्कलंक फल है। विधि न जाने किसको उस फल का भोक्ता बनाएगा।

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‘‘अनाघ्रातं पुष्पं किसलयमनूलं कररुहै:’’ यह उक्ति दुष्यन्त की है। दुष्यन्त शकुन्तला के रूप लावण्य को देखकर कहते हैं कि - ‘‘अनाघ्रातं पुष्पं किसलयममलूनं कररुहै रनाविद्धं रत्नं मधु नवमनास्वादितरसम्। अखण्ड पुण्यानां फलमिव च तद्रूपमनघं न जाने भोक्तारं किमिह समुपस्थास्यति विधि:।।’’ अर्थात् - वह बिना सूंघा हुआ पुष्प है। नाखूनों से अनछुई कोपल है, वेदाग रत्न है, अनजाने स्वादवाला ताजा शब्द शहद है, वह अखण्ड पुष्पों का निष्कलंक फल है। विधि न जाने किसको उस फल का भोक्ता बनाएगा।