Correct Answer:
Option A - ब्रिटिश सरकार ने भारत के अलग–अलग भागों में भू राजस्व की अलग–अलग व्यवस्था लागू की थी जैसे –
स्थायी बंदोबस्त - 1793 ई. में कार्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार, ओडिशा, बनारस आदि जगहों पर स्थायी बंदोबस्त की प्रथा का आरंभ किया। यह 19% भू-भाग पर लागू हुआ था। इसमें जमींदारों को भूस्वामी मान लिया गया।
रैय्यतवाड़ी व्यवस्था– 1820 में मद्रास, बम्बई एवं असम के कुछ भागों में लागू हुई थी। यह व्यवस्था सर्वप्रथम 1792 ई. में मद्रास के बारामहल जिले में लागू हुआ था। यह 51% भू-भाग पर लागू था। इस व्यवस्था में कृषक को ही भूमि का स्वामी माना गया था।
महालवाड़ी व्यवस्था– यह व्यवस्था आगरा, पंजाब, मध्य प्रांत में 30% भू-भाग पर लागू हुई थी। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि भारतीय किसानों में अलग–अलग वर्ग बन गए थे। अत: स्पष्ट है कि कथन एवं कारण दोनों सही हैं। कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
A. ब्रिटिश सरकार ने भारत के अलग–अलग भागों में भू राजस्व की अलग–अलग व्यवस्था लागू की थी जैसे –
स्थायी बंदोबस्त - 1793 ई. में कार्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार, ओडिशा, बनारस आदि जगहों पर स्थायी बंदोबस्त की प्रथा का आरंभ किया। यह 19% भू-भाग पर लागू हुआ था। इसमें जमींदारों को भूस्वामी मान लिया गया।
रैय्यतवाड़ी व्यवस्था– 1820 में मद्रास, बम्बई एवं असम के कुछ भागों में लागू हुई थी। यह व्यवस्था सर्वप्रथम 1792 ई. में मद्रास के बारामहल जिले में लागू हुआ था। यह 51% भू-भाग पर लागू था। इस व्यवस्था में कृषक को ही भूमि का स्वामी माना गया था।
महालवाड़ी व्यवस्था– यह व्यवस्था आगरा, पंजाब, मध्य प्रांत में 30% भू-भाग पर लागू हुई थी। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि भारतीय किसानों में अलग–अलग वर्ग बन गए थे। अत: स्पष्ट है कि कथन एवं कारण दोनों सही हैं। कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।