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Q: अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में निम्नलिखित में से कौन राज्यपाल था?
  • A. जलाल-उद्-दीन-खिलजी
  • B. शम्स-उद्-दीन इल्तुत्मिश
  • C. गयासुद्दीन तुगलक
  • D. नसीरूद्दीन महमूद
Correct Answer: Option C - गयासुद्दीन तुगलक अलाउद्दीन के शासनकाल में पंजाब (पश्चिमोत्तर प्रांत) प्रांत का राज्यपाल था। इसी ने खिलजी वंश के पश्चात 1320 ई. में ‘तुगलक वंश’ की स्थापना की। खिलजी वंश का संस्थापक जलालुद्दीन फिरोज खिलजी था तथा इसकी हत्या 1296 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ा मानिकपुर (इलाहाबाद) में कर दी। अलाउद्दीन ने सेना को नगद वेतन देने एवं स्थायी सेना की नींव रखी तथा घोड़े दागने और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा के साथ-साथ इसका प्रमुख कार्य ‘मूल्य नियंत्रण प्रणाली’ को लागू करना था। इसके शासनकाल के प्रमुख अधिकारी एवं उनके कार्य निम्न थे- दीवान-ए-रियासत- बाजार नियंत्रण की पूरी व्यवस्था शहना-ए-मंडी- बाजार का अधीक्षक बरीद- बाजार का निरीक्षक मुनहियान- गुप्त सूचना प्राप्त करना
C. गयासुद्दीन तुगलक अलाउद्दीन के शासनकाल में पंजाब (पश्चिमोत्तर प्रांत) प्रांत का राज्यपाल था। इसी ने खिलजी वंश के पश्चात 1320 ई. में ‘तुगलक वंश’ की स्थापना की। खिलजी वंश का संस्थापक जलालुद्दीन फिरोज खिलजी था तथा इसकी हत्या 1296 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ा मानिकपुर (इलाहाबाद) में कर दी। अलाउद्दीन ने सेना को नगद वेतन देने एवं स्थायी सेना की नींव रखी तथा घोड़े दागने और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा के साथ-साथ इसका प्रमुख कार्य ‘मूल्य नियंत्रण प्रणाली’ को लागू करना था। इसके शासनकाल के प्रमुख अधिकारी एवं उनके कार्य निम्न थे- दीवान-ए-रियासत- बाजार नियंत्रण की पूरी व्यवस्था शहना-ए-मंडी- बाजार का अधीक्षक बरीद- बाजार का निरीक्षक मुनहियान- गुप्त सूचना प्राप्त करना

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गयासुद्दीन तुगलक अलाउद्दीन के शासनकाल में पंजाब (पश्चिमोत्तर प्रांत) प्रांत का राज्यपाल था। इसी ने खिलजी वंश के पश्चात 1320 ई. में ‘तुगलक वंश’ की स्थापना की। खिलजी वंश का संस्थापक जलालुद्दीन फिरोज खिलजी था तथा इसकी हत्या 1296 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ा मानिकपुर (इलाहाबाद) में कर दी। अलाउद्दीन ने सेना को नगद वेतन देने एवं स्थायी सेना की नींव रखी तथा घोड़े दागने और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा के साथ-साथ इसका प्रमुख कार्य ‘मूल्य नियंत्रण प्रणाली’ को लागू करना था। इसके शासनकाल के प्रमुख अधिकारी एवं उनके कार्य निम्न थे- दीवान-ए-रियासत- बाजार नियंत्रण की पूरी व्यवस्था शहना-ए-मंडी- बाजार का अधीक्षक बरीद- बाजार का निरीक्षक मुनहियान- गुप्त सूचना प्राप्त करना