Correct Answer:
Option B - ‘अखियाँ हरि दरसन की भूखी। कैसे रहें रूप रस राँची ए बतियाँ सुनि रूखीं’ इसमें वियोग शृंगार रस है क्योंकि इसमें हरि के दर्शन के लिये आँखें तरस रही है। ‘सूरसागर’ का यह पद्यांश गोपियों की विरह दशा का मार्मिक वर्णन करता है।
B. ‘अखियाँ हरि दरसन की भूखी। कैसे रहें रूप रस राँची ए बतियाँ सुनि रूखीं’ इसमें वियोग शृंगार रस है क्योंकि इसमें हरि के दर्शन के लिये आँखें तरस रही है। ‘सूरसागर’ का यह पद्यांश गोपियों की विरह दशा का मार्मिक वर्णन करता है।