Correct Answer:
Option D - ‘अंगवधू’ दादूदयाल की रचना है। दादूदयाल के सम्प्रदाय को ‘ब्रह्म सम्प्रदाय’ या ‘परब्रह्म सम्प्रदाय’ नाम से जाना जाता है। दादूपंथ के उत्तराधिकारी दादू के पुत्र ‘गरीबदास’ तथा ‘मिस्कीनदास’ थे। दादू द्वारा रचित अन्य ग्रंथ हैं– हरडेबानी, कायाबोली आदि। दादूदयाल की वाणियों का सर्वप्रथम सम्पादन उनके दो शिष्य संतदास और जगन्नदास ने, ‘हरडेबानी’ शीर्षक से किया था पुन: रज्जब ने अंगवधू शीर्षक से इसका सम्पादन किया।
D. ‘अंगवधू’ दादूदयाल की रचना है। दादूदयाल के सम्प्रदाय को ‘ब्रह्म सम्प्रदाय’ या ‘परब्रह्म सम्प्रदाय’ नाम से जाना जाता है। दादूपंथ के उत्तराधिकारी दादू के पुत्र ‘गरीबदास’ तथा ‘मिस्कीनदास’ थे। दादू द्वारा रचित अन्य ग्रंथ हैं– हरडेबानी, कायाबोली आदि। दादूदयाल की वाणियों का सर्वप्रथम सम्पादन उनके दो शिष्य संतदास और जगन्नदास ने, ‘हरडेबानी’ शीर्षक से किया था पुन: रज्जब ने अंगवधू शीर्षक से इसका सम्पादन किया।